जमशेदपुर. टाटानगर स्टेशन से संचालित होने वाली बहुप्रतीक्षित टाटा-अमृतसर-टाटा जालियांवाला बाग एक्सप्रेस (18103-18104) को लगातार पांचवें सीजन में कोहरे का हवाला देकर रद्द किए जाने के बाद सिख समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है. इस मनमाने और पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ रविवार को साकची स्थित केंद्रीय गुरुद्वारा कमेटी (सीजीपीसी) के कार्यालय में एक उच्च-स्तरीय आपात बैठक बुलाई गई. बैठक में सिख समाज के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में रेलवे के इस निर्णय का विरोध किया और इसे समुदाय की भावनाओं पर बड़ा आघात करार दिया.
रेलवे के फैसले के खिलाफ खुली चेतावनी और आगामी रणनीति
आपात बैठक में सीजीपीसी के प्रधान सरदार भगवान सिंह ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि सिखों के साथ रेलवे का यह सौतेला और पक्षपातपूर्ण रवैया अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका है. उन्होंने एलान किया कि यदि रेलवे ने अपना यह तुगलकी फरमान वापस नहीं लिया, तो सिख संगत धरना-प्रदर्शन से लेकर उग्र आंदोलन और ट्रेनें रोकने जैसे कड़े कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगी. इसके परिणाम स्वरूप जो भी स्थिति उत्पन्न होगी, उसके लिए पूरी तरह रेलवे प्रशासन जिम्मेदार होगा.
वहीं, सीजीपीसी के चेयरमैन सरदार शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि स्थानीय सांसद विद्युत वरण महतो ने दूरभाष पर इस लड़ाई में पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है.
उन्होंने आंदोलन की रूपरेखा साझा कर बताया कि
- सोमवार को : दक्षिण पूर्व रेलवे के उप महाप्रबंधक मनीष जैन से मिलकर ज्ञापन सौंपा जाएगा.
- 7 अक्टूबर को: चक्रधरपुर मंडल मुख्यालय में डीआरएम तरुण हुरिया से एक प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करेगा.
- अंतिम चेतावनी: यदि इसके बावजूद ट्रेन संचालन शुरू नहीं किया गया, तो दुर्गा पूजा के तुरंत बाद व्यापक धरना-प्रदर्शन और रेल रोको आंदोलन का बिगुल फूंक दिया जाएगा.
‘क्यों सिर्फ सिख पर्व और शहीदी सप्ताह के दौरान ही निशाना बनाई जाती है ट्रेन?’
बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने सवाल उठाया कि आखिर हर बार सर्दियों के मौसम में और विशेषकर दिसंबर के महीने में ही जालियांवाला बाग और आनंद विहार जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों को ही क्यों निशाना बनाया जाता है, जबकि अन्य लंबी दूरी की ट्रेनें सुचारू रूप से संचालित होती रहती हैं.
सीजीपीसी के महासचिव अमरजीत सिंह ने कहा कि दिसंबर का महीना सिख समुदाय के लिए बेहद पवित्र और भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ शहीदी सप्ताह होता है. इसी माह में गुरु गोबिंद सिंह जी के साहेबजादों का विछोड़ा हुआ था और उन्होंने मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया था. इस दौरान सिख संगत शहादत दिवस पर पंजाब के सरहंद जाती है. हर साल इसी संवेदनशील समय पर ट्रेन रद्द करके रेलवे समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करता आ रहा है.
विभिन्न दलों और संगठनों का मिला खुला समर्थन
इस आपात बैठक में विभिन्न गुरुद्वारों के प्रधानों, महिला संगठनों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने शिरकत की. कांग्रेस के जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह ने केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन पर जमकर निशाना साधते हुए कांग्रेस पार्टी की ओर से इस आंदोलन को पूर्ण और नैतिक समर्थन देने की घोषणा की.
बैठक की शुरुआत गुरु चरणों में अरदास के साथ हुई. इस दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेता अवतार सिंह संधू, बर्मामाइंस से जोगा सिंह, नामदाबस्ती से दलजीत सिंह, टुईलाडुंगरी से सतबीर सिंह, जदयू जिला महामंत्री कुलविंदर सिंह पन्नू, टिनप्लेट प्रधान सुरजीत सिंह खुशीपुर, सीजीपीसी महासचिव गुरचरण सिंह बिल्ला, वरीय उपाध्यक्ष चंचल सिंह, महिला विंग से बीबी दलबीर कौर और बीबी रविंद्र कौर सहित तमाम प्रमुख हस्तियों ने अपने विचार रखे. सभी ने एक सुर में कहा कि अब चुप बैठने का समय नहीं है, बल्कि हक की लड़ाई के लिए सड़क से लेकर ट्रैक तक उतरना होगा.



