Close Menu
Ocean PostOcean Post
  • होम
  • झारखंड
    • विचार
    • स्वास्थ्य
  • बिहार
  • राजनीति
  • कारोबार
  • देश/दुनिया
  • मीडिया
  • ओसियन स्पेशल
  • रेलवे
Facebook X (Twitter) Instagram Threads
Ocean PostOcean Post
  • होम
  • झारखंड
    • विचार
    • स्वास्थ्य
  • बिहार
  • राजनीति
  • कारोबार
  • देश/दुनिया
  • मीडिया
  • ओसियन स्पेशल
  • रेलवे
Ocean PostOcean Post
  • होम
  • झारखंड
  • बिहार
  • राजनीति
  • कारोबार
  • देश/दुनिया
  • मीडिया
  • ओसियन स्पेशल
  • रेलवे
Home » सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: संविधान सभी कानूनों से ऊपर, त्वरित सुनवाई है नागरिकों का मौलिक अधिकार
देश/दुनिया

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: संविधान सभी कानूनों से ऊपर, त्वरित सुनवाई है नागरिकों का मौलिक अधिकार

Ocean News DeskBy Ocean News DeskNovember 6, 2026
Share Facebook Twitter WhatsApp Telegram Copy Link
Share
Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने न्याय व्यवस्था और नागरिकों के अधिकारों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारत का संविधान सभी प्रकार के कानूनों और नियमों से सर्वोपरि है। यदि एनडीपीएस (NDPS), यूएपीए (UAPA) या पीएमएलए (PMLA) जैसे किसी भी विशेष कानून के प्रावधानों और संविधान के बीच कोई विरोधाभास या टकराव उत्पन्न होता है, तो ऐसी स्थिति में केवल संविधान के प्रावधान ही प्रभावी माने जाएंगे।

संविधान के अनुच्छेद 21 पर विशेष जोर

न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त अधिकार केवल साधारण संवैधानिक अधिकार नहीं हैं, बल्कि यह नागरिकों के अत्यंत महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार हैं। जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का यह अधिकार हमारे संवैधानिक न्यायशास्त्र का मुख्य आधार है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इन बुनियादी मौलिक अधिकारों के साथ किसी भी परिस्थिति में हल्के ढंग से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता, चाहे मामला कितना भी गंभीर विशेष कानून से जुड़ा क्यों न हो।

त्वरित सुनवाई (स्पीडी ट्रायल) और जमानत का अधिकार

जस्टिस उज्जवल भुयान और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने यह दोहराया कि त्वरित सुनवाई यानी स्पीडी ट्रायल का अधिकार प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। इसे किसी भी कानूनी प्रक्रिया के तहत छीना या नकारा नहीं जा सकता। यदि किसी मामले की सुनवाई में अनावश्यक देरी होती है, तो यह आरोपी की जमानत का आधार बन सकता है। अदालत ने अपने पहले के एक पुराने आदेश पर भी सवाल उठाया, जिसमें एनडीपीएस एक्ट जैसी धाराओं के तहत अनुच्छेद 21 के अधिकारों को प्रतिबंधित करने की बात कही गई थी।

कानूनों की व्याख्या पर अदालत का रुख

बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संविधान की व्याख्या कभी भी कानूनों के आधार पर नहीं की जानी चाहिए, बल्कि इसके विपरीत कानूनों की व्याख्या हमेशा संविधान के दायरे और उसकी मूल भावना के आधार पर होनी चाहिए। कोई भी कानून, चाहे वह सामान्य हो या विशेष, संविधान की व्याख्या का मार्गदर्शक नहीं बन सकता।

वर्तमान में पीएमएलए, एनडीपीएस और यूएपीए जैसे मामलों में ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत देने को लेकर विभिन्न पीठों के बीच मतभेद सामने आ रहे थे। इस महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसले के बाद, अब इस पूरे और जटिल कानूनी मुद्दे को एक बड़ी बेंच के पास विचार के लिए भेज दिया गया है।

Article 21 Constitution Fundamental Rights Indian Law National News Speedy Trial Supreme Court अनुच्छेद 21 कानून त्वरित सुनवाई देश देश दुनिया मौलिक अधिकार संविधान सुप्रीम कोर्ट
Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
Previous Articleजमशेदपुर में भाजपा ने भरी हुंकार, रघुवर दास और सरयू राय की एक मंच पर मौजूदगी से लौहनगरी की राजनीति गरम 
Next Article चेतावनी: रांची एयरपोर्ट में नौकरी के नाम पर चल रहा बड़ा फर्जीवाड़ा, AAI ने युवाओं के लिए जारी किया अलर्ट
Ocean News Desk
  • Website

Ocean Post का आधिकारिक News Desk, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और सबसे तेज़ ख़बरें पहुंचाने के लिए समर्पित है. हमारी अनुभवी एडिटोरियल टीम 24 घंटे देश-दुनिया, राजनीति, मनोरंजन, खेल और समसामयिक मुद्दों पर पैनी नज़र रखती है. हमारा प्रयास है कि पाठकों को भरोसेमंद और उच्च गुणवत्ता वाली जानकारी दी जा सके.

Related Posts

देश/दुनिया

पॉकेट मनी के नाम पर डॉलर की डिमांड! जज साहब बोले- भाई हमारी सैलरी ही 3 लाख है, पत्नियों को ऐसे शानदार आइडिया मत दो!

November 5, 2026
देश/दुनिया

UGC नियमों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी: जातिगत भेदभाव और समानता से जुड़े विवादित रेगुलेशंस की होगी समीक्षा, केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में हुई राजी

November 5, 2026
देश/दुनिया

देशव्यापी चुनाव सुधार: चुनाव आयोग ने 6 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में शुरू किया एसआरआर (SSR), 21 जनवरी को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट

November 5, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

अभी-अभी

भोजपुर में पूर्व कस्टम अधिकारी हत्याकांड: पुलिस मुठभेड़ में मुख्य शूटर घायल, पैर में लगी गोली

November 6, 2026

पटना में दहला इलाका: पुलिस-अपराधियों के बीच 20 मिनट तक चली भीषण मुठभेड़, 3 कुख्यात शूटर ढेर, मनेर SHO भी जख्मी

November 6, 2026

इस बार दीपोत्सव का अनूठा संयोग: छह दिनों तक बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, जानिए धनतेरस से लेकर भाई दूज तक के सभी शुभ मुहूर्त

November 6, 2026

झारखंड: ऑनलाइन बुकिंग के बाद कमरा न देना होटल को पड़ा भारी, अब 30,670 रुपये चुकाने का आदेश

November 6, 2026

दर्दनाक हादसा: झारखंड के खूंटी में अनियंत्रित ट्रक का कहर, एक ही परिवार के चार महिलाओं और तीन बच्चों समेत सात की मौत से मातम

November 6, 2026
Advertisement
Ocean Post
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
  • About Us oceanpost
  • Advertise With Us
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact
© 2026 Ocean Post. Designed by Launching Press.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

Join OceanPost