नई दिल्ली: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी, समावेशी और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए देश के छह राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग के इस देशव्यापी फैसले से चुनावी तंत्र में सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसका सीधा असर आगामी चुनावों की तैयारियों पर पड़ेगा।
किन क्षेत्रों में होगी यह प्रक्रिया?
चुनाव आयोग द्वारा घोषित इस नई चुनावी कवायद के दायरे में अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम को शामिल किया गया है। आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का हर एक पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सके, ताकि चुनाव के दौरान कोई भी नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
युवाओं और नए मतदाताओं पर विशेष फोकस
इस विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत युवा वर्ग और पहली बार मतदान करने वाले (First-time voters) नागरिकों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, वे युवा भी इस प्रक्रिया के तहत अग्रिम रूप से आवेदन करने के योग्य होंगे जो आगामी 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे और मतदाता बनने की पात्रता प्राप्त करेंगे।
क्या है पूरा शेड्यूल?
आयोग द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक, इन क्षेत्रों में मतदाता सूची का मसौदा (Draft Electoral Roll) आगामी 30 नवंबर को प्रकाशित किया जाएगा, जिस पर आपत्तियां और दावे दर्ज कराए जा सकेंगे। इसके उपरांत, सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद 21 जनवरी को अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) आधिकारिक रूप से जारी कर दी जाएगी।
इस बीच, चुनाव आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस वृहद अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए मैदानी स्तर पर पर्याप्त जनशक्ति, प्रशासनिक संसाधन और बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करें। विश्लेषकों का मानना है कि यह देशव्यापी कदम आगामी चुनावी रण से पहले मतदाता सूचियों को पूरी तरह दुरुस्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।


