रांची. झारखंड के लाखों मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई सहारा इंडिया की विभिन्न स्कीमों में फंसकर रह गई है. आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के कारण अब तक राज्य में 70 से अधिक पीड़ित निवेशक आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने को मजबूर हो चुके हैं. इसके बावजूद समाधान न निकलने से आक्रोशित निवेशकों ने अब सरकार और प्रशासन के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है. रविवार को राजधानी रांची स्थित लोकभवन के सामने राज्यभर से जुटे सैकड़ों सहारा पीड़ितों ने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन शुरू करेंगे.
आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि राज्य सरकार इस गंभीर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे और सहारा समूह की संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया के जरिए निवेशकों के बकाए का भुगतान सुनिश्चित कराए.
32 हजार करोड़ रुपये फंसे, चुनाव पूर्व वादे पर घेरा
विश्व भारती जनसेवा संस्थान के बैनर तले आयोजित इस सत्याग्रह में राज्य के कोने-कोने से पीड़ित पहुंचे हैं. सीआईडी जांच के आंकड़ों के अनुसार, केवल झारखंड के निवेशकों के करीब 32 हजार करोड़ रुपये सहारा समूह की कंपनियों में अटके पड़े हैं.
प्रदर्शनकारी निवेशकों ने राज्य सरकार को 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले किए गए उस वादे की याद दिलाई, जिसमें सत्ता में आने पर सहारा से निवेशकों की पाई-पाई वापस दिलाने का भरोसा दिया गया था. आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि राज्य सरकार इस गंभीर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे और सहारा समूह की संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया के जरिए निवेशकों के बकाए का भुगतान सुनिश्चित कराए.
मृतकों के आश्रितों के लिए 10-10 लाख मुआवजे की मांग सत्याग्रह में शामिल प्रतिनिधियों ने कहा कि सहारा की कंपनियों ने निवेशकों को पांच साल चार महीने में राशि दोगुनी करने और 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर का लुभावना लालच देकर उनकी जमा पूंजी हड़प ली. परिपक्वता अवधि (मैच्योरिटी) पूरी होने के बाद भी जब लोगों को उनके अपने पैसे नहीं मिले, तो कई परिवार भुखमरी और गंभीर बीमारियों के इलाज के अभाव में बिखर गए.
तनाव में आकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने वाले 70 से अधिक निवेशकों के परिवारों को न्याय दिलाने की मांग उठाई गई है. संगठन ने सरकार से मांग की है कि मृतक निवेशकों के आश्रितों को तुरंत 10-10 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए.
सीआईडी जांच और एफआईआर के बाद भी राहत का इंतजार
गौरतलब है कि फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के इस बड़े मामले में राज्य पुलिस की अपराध अनुसंधान शाखा (सीआईडी) ने जांच के बाद सहारा समूह के उच्च अधिकारियों और निदेशकों—जैसे स्वप्ना राय, जयब्रत राय, सुशांतो राय, सिमांतो राय, ओम प्रकाश श्रीवास्तव, नीरज कुमार पाल, जितेंद्र कुमार बरसाने, श्याम वीर सिंह, अलख सिंह, पवन कपूर और तापस राय सहित कई अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.
सीआईडी द्वारा कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है और कानूनी प्रक्रिया जारी है. हालांकि, पीड़ितों का कहना है कि पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से ज्यादा उनके लिए अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई का वापस मिलना जरूरी है. जब तक सरकार और प्रशासन उनकी मांगें पूरी नहीं करता, यह सत्याग्रह जारी रहेगा.


