- कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी
अयोध्या. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दो सबसे कद्दावर चेहरे महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा को इस्तीफे के बाद ट्रस्ट से बाहर कर दिया गया है. ट्रस्ट की सोमवार को बुलायी गयी आपात बैठक में कृष्ण मोहन को अंतरिम तौर पर कामकाज संभालने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी.
यह पूरी कार्रवाई मंदिर परिसर से कीमती सामानों और दानपात्रों से कथित ‘चोरी’ के गंभीर आरोपों के बाद उपजे भारी विवाद के बीच हुई है.
कैसे पलटा पूरा घटनाक्रम, क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
ट्रस्ट की इस आपातकालीन और बेहद महत्वपूर्ण बैठक के बाद कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. उन्होंने बेहद भावुक और कड़े शब्दों में कहा, “यह बैठक अत्यंत असाधारण और दुखद परिस्थितियों में हुई है.
राम मंदिर के लिए अनगिनत लोगों ने अपने प्राण, परिवार और करियर की परवाह नहीं की. आज उसी पावन धाम में चोरी की बात सामने आने से हम सब अत्यंत लज्जित और दुखी हैं.”
गोविंद देव गिरी जी ने स्पष्ट किया कि महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने मौजूदा विवाद और नैतिक ज़िम्मेदारी को देखते हुए खुद ही अपने इस्तीफे की पेशकश की थी.
के. पारासरण ने कानूनन साफ किया रास्ता
बैठक की सबसे खास बात यह रही कि 99 वर्षीय कानूनी दिग्गज और ट्रस्ट के संविधान निर्माता के. पारासरण पूरे समय दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे. जब ट्रस्ट के सदस्यों के बीच इस्तीफे को स्वीकार करने या न करने पर असमंजस की स्थिति थी, तब पारासरण जी ने ट्रस्ट के नियमों का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की.
उन्होंने संविधान पढ़कर सुनाया कि नियमों के मुताबिक, कोई भी पदाधिकारी यदि त्यागपत्र देता है, तो वह तत्काल प्रभाव से स्वीकृत मान लिया जाता है. ऐसे में ट्रस्ट के पास इसे स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.
हालांकि, ट्रस्ट ने चंपत राय द्वारा राम मंदिर आंदोलन और निर्माण में दिए गए ऐतिहासिक योगदान की सराहना की और उनकी सेवाओं का अभिनंदन किया. चंपत राय के साथ ही विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को भी ट्रस्ट से बाहर कर दिया गया है.
आरोपों पर पलटवार: ‘रजिस्टर’ के साथ मीडिया के सामने आया ट्रस्ट
समाज में फैल रहे भ्रम और विपक्ष के हमलों को शांत करने के लिए कोषाध्यक्ष ने मीडिया के सामने एक बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह अफवाह फैलाई जा रही है कि न केवल दानपात्रों से नकदी, बल्कि कई बहुमूल्य प्राचीन वस्तुएं भी गायब हुई हैं.
इस भ्रम को तोड़ने के लिए ट्रस्ट ने बकायदा 2,800 से अधिक कीमती वस्तुओं का विस्तृत ‘इन्वेंट्री रजिस्टर’ मीडिया के सामने पेश किया और प्रमाण के तौर पर कुछ बेशकीमती वस्तुएं दिखाईं. ट्रस्ट ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में पारदर्शिता और सुरक्षा को और ज्यादा पुख्ता किया जाएगा.
SIT जांच और 22 जुलाई की अगली तारीख
इस पूरे मामले की जांच के लिए शासन द्वारा एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन पहले ही किया जा चुका है. गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि आगामी 22 जुलाई को ट्रस्ट की अगली बड़ी बैठक होगी. तब तक एसआईटी (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने की पूरी उम्मीद है. रिपोर्ट की समीक्षा के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही, खाली हुए पदों पर नए न्यासियों (Trustees) की नियुक्ति की घोषणा भी उसी बैठक में संभावित है.
‘जिन्होंने कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं, वे उपदेश न दें’
राजनीतिक बयानबाजी पर तीखा हमला बोलते हुए कोषाध्यक्ष ने कहा कि जिन्होंने कभी कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं और जो कल तक भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठा रहे थे, वे आज अचानक रामभक्त बनकर उपदेश दे रहे हैं. उन्होंने देश के करोड़ों रामभक्तों से अपील की कि वे धैर्य रखें और किसी भी बहकावे में न आएं. अपराधियों को कड़ी सजा मिलेगी और रामराज्य की स्थापना का संकल्प बिना रुके जारी रहेगा.
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