नई दिल्ली/धनबाद. झारखंड के धनबाद और उसके आस-पास के इलाकों में वर्षों से समानांतर व्यवस्था की तरह चल रहे अवैध कोयला खनन और चोरी के काले कारोबार पर केंद्र सरकार अब तक का सबसे बड़ा प्रहार करने जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें धनबाद क्षेत्र में अवैध खनन और कोयले के गैर-कानूनी परिवहन की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई.
अमित शाह ने इस काले साम्राज्य को पूरी तरह ध्वस्त करने के उद्देश्य से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को संवेदनशील इलाकों में तत्काल “ज़ीरो कोल लीकेज प्लान” (Zero Coal Leakage Plan) लागू करने का कड़ा निर्देश दिया है. गृह मंत्री ने साफ लफ्ज़ों में चेतावनी दी है कि अब कोयला चोरी और अवैध खनन करने वाले किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे.
MMDR एक्ट के तहत सीआईएसएफ और कोल इंडिया को मिलीं असीमित शक्तियां
बैठक के दौरान गृह मंत्री को अवगत कराया गया कि अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए CISF और कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के अधिकारियों को ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957’ (MMDR Act) के तहत व्यापक कानूनी अधिकार सौंप दिए गए हैं.
इन नई शक्तियों के मिलने के बाद अब ये एजेंसियां राज्य पुलिस पर निर्भर रहे बिना सीधे निम्नलिखित कानूनी कार्रवाइयां कर सकेंगी
- सीधे अदालत में मुकदमा: अवैध खनन में लिप्त लोगों और माफियाओं के खिलाफ सीधे कोर्ट में आपराधिक केस दर्ज कराया जा सकेगा.
- संदेह के आधार पर छापेमारी: जिन ठिकानों या डिपो में अवैध कोयला डंप किए जाने का अंदेशा होगा, वहां बलपूर्वक प्रवेश और तलाशी (Search and Seizure) ली जा सकेगी.
- जब्ती और कुर्की: अवैध कोयले के साथ-साथ इस धंधे में इस्तेमाल होने वाले औजारों, पोकलेन, भारी मशीनों और परिवहन में लगी गाड़ियों (ट्रकों व ट्रेलरों) को मौके पर ही जब्त किया जाएगा.
गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि इन शक्तियों का उपयोग पूरी मुस्तैदी, आपसी समन्वय और स्वीकृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत बेहद कड़ाई से किया जाए.
‘मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा’ और ‘क्विक रिस्पांस टीम’ का ब्लूप्रिंट
अमित शाह ने सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए CISF को संवेदनशील और डेंजर ज़ोन वाले इलाकों में मल्टी-लेयर्ड (बहु-स्तरीय) सुरक्षा चक्र तैयार करने को कहा है. इसके साथ ही विशेष ‘क्विक रिस्पांस टीम’ (QRT) का गठन किया जाएगा, जो अवैध खनन की गुप्त सूचना या इनपुट मिलते ही पलक झपकते एक्शन मोड में आ जाएगी. गृह मंत्रालय ने CISF की तैनाती की प्राथमिकता सूची (Priority List) में कोयला क्षेत्र को शीर्ष पर शामिल करने का फैसला किया है ताकि मैनपावर की कोई कमी न रहे.
तकनीक से निगरानी: हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और GST ई-वे बिल की जांच
इस हाई-टेक लड़ाई में अब आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा. गृह मंत्री ने आदेश दिया है कि ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ (ICCC) में लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों के ज़रिए उन भौगोलिक क्षेत्रों और संदिग्ध चेहरों की पहचान की जाए जो रात के अंधेरे या दिन के उजाले में इस अवैध खेल को अंजाम देते हैं.
इसके अतिरिक्त, अवैध कोयले की ढुलाई के आर्थिक तंत्र को तोड़ने के लिए GST अधिकारियों की मदद ली जाएगी. सड़कों पर दौड़ने वाले कोयला लदे ट्रकों के ‘ई-वे बिल’ (e-way bills) की कड़ाई से जांच करने के लिए एक अचूक वेरिफिकेशन सिस्टम बनाया जा रहा है, ताकि बाजार में केवल कानूनी रूप से माइनिंग किया गया कोयला ही बिक सके.
दिसंबर 2025 में ही रखी गई थी इस चक्रव्यूह की नींव
कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि अक्टूबर 2025 की समीक्षा बैठक में तैयार की गई थी.
इसके बाद दिसंबर 2025 में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में ‘कोयला क्षेत्र समन्वय समिति’ (Coal Sector Coordination Committee) के गठन का फैसला लिया गया था, जो अब पूरी तरह क्रियान्वित हो चुकी है.
इस नई व्यवस्था से उम्मीद जताई जा रही है कि झारखंड के राजस्व को चपत लगाने वाले और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले कोयला सिंडिकेट का अब हमेशा के लिए खात्मा हो जाएगा.
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