पटना: भारतीय जनसंघ के संस्थापक और अखंड भारत के स्वप्नद्रष्टा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के विशेष अवसर पर देश और राज्य स्तर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई. इस ऐतिहासिक मौके पर बिहार की नीतीश-सम्राट सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला लिया है, जो आने वाले दिनों में राज्य के शहरी और ग्रामीण परिदृश्य को एक नई पहचान देगा.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का ऐलान, बिहार के जिला मुख्यालयों में बनेंगे पार्क और सड़कें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नमन करते हुए राज्य की जनता के लिए एक बड़ी घोषणा की. उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया (X) हैंडल के माध्यम से बताया कि देश की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले युगपुरुष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए बिहार सरकार प्रतिबद्ध है.
मुख्यमंत्री ने एलान किया कि अब बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में महत्वपूर्ण सड़कों और पार्कों का निर्माण कराया जाएगा और उनका नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर होगा. इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में यदि आप बिहार के किसी भी जिले से गुजरें और वहां आपको ‘श्याम प्रसाद मुखर्जी मार्ग’ या ‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मृति पार्क’ देखने को मिले, तो चौंकिएगा मत.
सम्राट चौधरी ने अपने संदेश में डॉ. मुखर्जी के एक प्रसिद्ध कथन को भी साझा किया
“राष्ट्रीय एकता के धरातल पर ही सुनहरे भविष्य की नींव रखी जा सकती है.” उन्होंने डॉ. मुखर्जी को मानवता का उपासक, जनसंघ का संस्थापक और अपनी सरकार का प्रेरणा पुंज बताते हुए उनके चरणों में कोटिशः नमन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया ‘महान राष्ट्र-निर्माता’
इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर देश की ओर से उन्हें गहरी श्रद्धांजलि दी. पीएम मोदी ने डॉ. मुखर्जी को भारत के सबसे असाधारण और प्रमुख राष्ट्र-निर्माताओं में से एक स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का पूरा जीवन विद्वता, साहस और राष्ट्र सेवा के प्रति अटूट समर्पण का एक बेजोड़ उदाहरण रहा है. उन्होंने खुद को पूरी तरह से भारत की एकता, सम्मान और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था.
प्रधानमंन्त्री ने डॉ. मुखर्जी की बहुआयामी विरासत और विभिन्न क्षेत्रों में उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए कहा:
- शिक्षाविद् और विचारक: वह एक उत्कृष्ट विचारक थे जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा नवाचार (Innovation) और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सीखने-सिखाने की प्रक्रियाओं का पुरजोर समर्थन किया.
- औद्योगिक आत्मनिर्भरता की नींव: देश के पहले उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी. उन्होंने आधुनिक उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया कि देश के पारंपरिक क्षेत्र और आम लोगों की आजीविका फलती-फूलती रहे.
- मानवीय संवेदनाएं: बंगाल के भीषण अकाल के दौरान डॉ. मुखर्जी द्वारा किए गए मानवीय प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि मुसीबत में घिरे लोगों के प्रति उनके दिल में कितनी गहरी संवेदना थी.
राष्ट्र की एकता के लिए स्थायी प्रेरणा
पीएम मोदी और सीएम सम्राट चौधरी दोनों ने ही इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के प्रति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अटूट प्रतिबद्धता आज भी देश के नागरिकों और सरकार के लिए प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बनी हुई है. उनके यही विचार आज देश को ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं. बिहार सरकार का यह नया कदम इसी वैचारिक विरासत को आम जनमानस तक पहुँचाने का एक सराहनीय प्रयास माना जा रहा है.
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