Ayodhya. राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के लगभग 70,000 पृष्ठ के आरोप पत्र के अनुसार दान राशि का गबन नकदी की गिनती की प्रक्रिया के दौरान हुआ था और एक पूरा नेटवर्क शामिल था. आरोप पत्र में कहा गया है कि गिनती वाली जगह से नकदी हटाए जाने की 105 घटनाएं सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई हैं.
आरोप पत्र में आठ आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला उर्फ शनि, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव का नाम शामिल है, जो न्यायिक हिरासत में हैं. दान प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की प्रारंभिक एसआईटी जांच के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर 25 जून को मामला दर्ज किया गया था.
आरोप पत्र के अनुसार, जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज की जांच करके, डिजिटल साक्ष्यों, गवाहों के बयानों, बैंकिंग रिकॉर्ड और फॉरेंसिक ऑडिट के साथ इसका मिलान करके गिनती केंद्र से अनधिकृत रूप से नकदी हटाने या छिपाने के 105 मामलों की पहचान की.
एसआईटी ने कहा है कि गिने गए पैसे को बैंकों में स्थानांतरित करने के दौरान गबन का कोई सबूत नहीं मिला. जांच में आरोपियों और उनके रिश्तेदारों से जुड़े बैंक खातों, संपत्तियों, वाहनों और अन्य संपत्तियों के जरिए पैसे के कथित लेन-देन का भी पता लगाया गया. पुलिस ने आठ में से सात आरोपियों से संदिग्ध गबन से जुड़े 79.85 लाख रुपये कथित तौर पर बरामद किए, जबकि श्रीवास्तव से ऐसी कोई बरामदगी नहीं हुई.


