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Home » Railway….राजधानी, शताब्दी और दुरंतो एक्सप्रेस को मालगाड़ी के ‘लोको पायलट’ से न चलवाएं, ‘रूट लर्निंग’ को लेकर सख्त निर्देश जारी
देश/दुनिया

Railway….राजधानी, शताब्दी और दुरंतो एक्सप्रेस को मालगाड़ी के ‘लोको पायलट’ से न चलवाएं, ‘रूट लर्निंग’ को लेकर सख्त निर्देश जारी

Ocean News DeskBy Ocean News DeskOctober 1, 2026
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New Delhi. पश्चिम बंगाल में एक यात्री ट्रेन द्वारा लाल बत्ती (सिग्नल) की अनदेखी किए जाने की घटना के बाद रेलवे बोर्ड ने सभी रेलवे जोन को बिना उचित ‘रूट लर्निंग’ (मार्ग की पूर्ण जानकारी या प्रशिक्षण) के ट्रेन चालकों की तैनाती नहीं करने की सख्त हिदायत दी है. पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल में सीतारामपुर स्टेशन पर 29 जुलाई, 2026 को हुई इस घटना की जांच के दौरान यह बात सामने आई कि संबंधित ट्रेन के चालक दल को उस मार्ग का पर्याप्त ज्ञान नहीं था.

रेलवे नियमों के अनुसार, किसी भी नए मार्ग पर ट्रेन चलाने से पहले लोको पायलट और उनके सहायक को उस मार्ग पर नियमित रूप से संचालित होने वाली ट्रेनों में सफर करके मार्ग की भौगोलिक स्थिति, सिग्नल और मोड़ों की पूरी जानकारी यानी ‘रूट लर्निंग’ लेना अनिवार्य होता है. हालांकि, ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें अपर्याप्त ‘रूट लर्निंग’ वाले चालकों को ड्यूटी पर तैनात कर दिया गया. इसके कारण चालकों द्वारा सिग्नल की अनदेखी किए जाने (एसपीएडी) की घटनाएं हुईं और यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ी.

रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को भेजा निर्देश
रेलवे बोर्ड ने 24 अगस्त, 2026 को सभी जोन को भेजे पत्र में कहा कि केवल ‘रूट लर्निंग’ पूरा करने वाले चालकों की ही ड्यूटी लगाई जाए और इस नियम का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाए. बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह फैसला पांच अगस्त को हुई बैठक में 29 जुलाई की सीतारामपुर घटना पर चर्चा के बाद लिया गया है. रेलवे में लाल सिग्नल की अनदेखी को तकनीकी भाषा में ‘एसपीएडी’ (सिग्नल पासिंग एट डेंजर) कहा जाता है. रेलवे बोर्ड ने कहा कि चालक दल प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) में पहले से ही ऐसा ब्योरा मौजूद है जिससे इस तरह के उल्लंघनों को पकड़ा जा सकता है. बोर्ड ने निर्देश दिया कि यदि मौजूदा श्रेणियों में ऐसे मामलों को दर्ज करने का प्रावधान न हो, तो सॉफ्टवेयर में जरूरी संशोधन किया जाए. रेलवे बोर्ड ने चालकों (लोको पायलट) की कमी की स्थिति में भी बिना ‘रूट लर्निंग’ के किसी को तैनात न करने को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

पत्र के अनुसार, राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी ट्रेनों को किसी भी स्थिति में मालगाड़ी के लोको पायलट से न चलवाया जाए और जरूरत पड़ने पर तय रोस्टर (नियमित लिंक) से ही चालकों की व्यवस्था की जाए. वहीं, मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन आमतौर पर मेल या पैसेंजर लोको पायलट ही करेंगे. यदि वे उपलब्ध न हों, तो ‘ए-ग्रेड’ प्रमाणपत्र प्राप्त मालगाड़ी के चालकों की उचित जांच कर एक अलग पैनल तैयार किया जाए.

बोर्ड के अनुसार, यदि पैनल का भी कोई चालक उपलब्ध न हो, तो इंजन में चालक के साथ लोको निरीक्षक की मौजूदगी अनिवार्य होगी. इसके अलावा, यदि किसी विशेष प्रकार के इंजन के लिए सक्षम चालक उपलब्ध न हो, तो इंजन को ही बदलकर ऐसा इंजन लगाया जाए जिसे उपलब्ध चालक चलाने में सक्षम हो. बोर्ड के इस पत्र से पहले भी रेल प्रशासन ने ऐसे कई मामलों को दर्ज किया था जिनमें बिना ‘रूट लर्निंग’ के चालकों को तैनात किया गया था.

हाल में ये घटनाएं भी आयीं सामने
हाल ही में वाराणसी से पंजाब के छेहरटा जाने वाली ‘सीर गोवर्धनपुर वाराणसी एक्सप्रेस’ को सात अगस्त, 2026 को अमृतसर स्टेशन पर लगभग 15 मिनट तक इसलिए रोकना पड़ा क्योंकि अधिकारियों को अहसास हुआ कि चालक दल को अमृतसर से छेहरटा के सात किलोमीटर के रास्ते की जानकारी नहीं थी.

बाद में एक मुख्य लोको निरीक्षक को उनके साथ भेजकर ट्रेन रवाना की गई. इसी तरह 10 अगस्त, 2026 को वाराणसी से इंदौर जा रही ‘काशी महाकाल सुपरफास्ट एक्सप्रेस’ को भोपाल के निशातपुरा स्टेशन पर इसलिए रोकना पड़ा, क्योंकि चालक दल के पास संत हिरदाराम नगर स्टेशन तक का ‘रूट लर्निंग’ नहीं था. इसके बाद निशातपुरा से दूसरे चालक दल की व्यवस्था कर ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया.

: Do not have Rajdhani ' protocols emphasized. 'loco pilots' meant for ‘रूट लर्निंग' को लेकर सख्त निर्देश जारी and Duronto Express trains operated by freight trains; 'route learning Railway....राजधानी Railways issues strict directives Shatabdi शताब्दी और दुरंतो एक्सप्रेस को मालगाड़ी के 'लोको पायलट' से न चलवाएं
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