- पांच बार के सांसद हैं प्रल्हाद जोशी, कर्नाटक के धारवाड़ से साल 2004 में जीत कर लोकसभा पहुंचे थे
- कद्दावर नेता के कंधों पर आई देश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी, पिता रेलवे में सेवारत थे, शुरुआती पढ़ाई-लिखाई हुबली के रेलवे स्कूल से हुई
नई दिल्ली. देश की सियासत और शिक्षा जगत में चल रहे भारी उथल-पुथल के बीच आखिरकार शिक्षा मंत्रालय के नए कैप्टन का ऐलान हो चुका है. कुछ ही समय पहले तक कई अहम मंत्रालयों की कमान संभालने वाले एक अनुभवी और पांच बार के दिग्गज सांसद को अब देश की शिक्षा व्यवस्था की बागडोर सौंप दी गई है. यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब देश का युवा वर्ग और छात्र समुदाय तमाम व्यवस्थाओं को लेकर एक बड़े चौराहे पर खड़ा है.
आखिर क्यों पड़ी नए शिक्षा मंत्री की जरूरत?
हाल के दिनों में नीट (NEET) पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाओं और इसके विरोध में राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए लंबे तथा उग्र प्रदर्शनों ने केंद्र सरकार को हिलाकर रख दिया था. लगातार बढ़ते दबाव और तीखे विरोध के चलते पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे के बाद से ही यह सवाल सबसे बड़ा बन गया था कि आखिर इस अति संवेदनशील और महत्वपूर्ण मंत्रालय की खाली कुर्सी पर कौन बैठेगा? इस सस्पेंस से पर्दा उठाते हुए सरकार ने धारवाड़ से पांच बार के सांसद प्रल्हाद जोशी को इस पद का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है.
कौन हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी?
राजनीतिक गलियारों में मजबूत पकड़ रखने वाले प्रल्हाद जोशी का सफर काफी दिलचस्प रहा है. उनका जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के बीजापुर में हुआ था. उनके पिता भारतीय रेलवे में सेवारत थे, जिसके कारण उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई हुबली के ही रेलवे स्कूल से शुरू हुई.
इसके बाद उन्होंने हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. उच्च शिक्षा के प्रति अपने समर्पण को दिखाते हुए उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध हुबली के प्रसिद्ध के.एस. आर्ट्स कॉलेज में प्रवेश लिया और साल 1983 में बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) की डिग्री हासिल की. व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो वर्ष 1992 में उनका विवाह ज्योति जोशी से हुआ और उनके तीन बच्चे हैं.
राजनीतिक सफर और उपलब्धियां
प्रल्हाद जोशी की प्रशासनिक क्षमता और अनुभव का दायरा काफी विस्तृत है. वे पहली बार साल 2004 में कर्नाटक की प्रमुख धारवाड़ लोकसभा सीट से संसद पहुंचे थे. इसके बाद पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी और वे लगातार पांच बार इसी सीट से विजयी होते चले आ रहे हैं.
शिक्षा मंत्रालय का प्रभार संभालने से पहले वे केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. उन्होंने संसदीय मामलों के मंत्री के साथ-साथ कोयला और खान मंत्रालय का कार्यभार भी बेहद कुशलता से संभाला है. वर्तमान में वे उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, और अब उनके प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन पर शिक्षा विभाग का अतिरिक्त भार भी डाल दिया गया है.
नई जिम्मेदारी मिलने पर क्या कहा?
पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद प्रल्हाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे इस चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएंगे. साथ ही, उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे देश के प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं और आधुनिक भारत की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे.
बहरहाल, देश के युवाओं और छात्रों की उम्मीदों के केंद्र में आए नए शिक्षा मंत्री के सामने आने वाले दिन काफी परीक्षा भरे रहने वाले हैं, जहां शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी.
शनिवार को पद संभालने के बाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मुझ पर विश्वास जताया है और मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। पूर्ण विनम्रता और दृढ़ जिम्मेदारी बोध के साथ मैं इस दायित्व को निभाऊंगा। प्रधानमंत्री का इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए आभार।
धर्मेंद्र प्रधान की तारीफ करते हुए कही यह बात
प्रल्हाद जोशी ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तारीफ करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं1
उन्होंने कहा कि पिछले 4-5 वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लागू किया और कई महत्वपूर्ण पहल कीं। नई शिक्षा व्यवस्था में देश ने काफी प्रगति की है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं पूरी क्षमता से काम करूंगा.
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