सात लोगों के खिलाफ ‘पुख्ता संदेह’
न्यायाधीश गोगने ने कहा कि धन शोधन के अपराध के मामले में सात लोगों के खिलाफ ‘पुख्ता संदेह’ है तथा जांच का स्वरूप, समय और तरीका – ऐसा नहीं लगता कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित हो, जैसा कि आरोपियों के वकीलों ने दलील दी है। अदालत ने कहा, ‘‘कुछ संदिग्ध सौदे असल में सबके सामने किए जाते हैं, जहां आम लोगों की मौजूदगी असलियत जानने के बजाय उसे छिपाने का काम करती है। अदालत इस बात पर खास तौर पर गौर करेगी कि सीबीआई और पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) मामलों, खासकर सांसद और विधायक (एमपी/एमएलए) से जुड़े मुकदमे की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत का उद्देश्य ही ऐसे छिपे हुए और अनैतिक सौदों का पता लगाना है, जिनमें निजी फायदे के लिए जनता के भरोसे और संपत्ति का सौदा किया जाता है।’
होटलों का पट्टा देने की निविदा में हेर-फेर
अदालत ने कहा कि 2005 से 2014 के बीच की अवधि से जुड़े ईडी के आरोपों से साफ पता चलता है कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद के कहने पर रेलवे अधिकारियों ने रांची और ओडिशा के पुरी में होटलों का पट्टा सुजाता होटल को देने के लिए निविदा में हेर-फेर की थी। अदालत ने कहा, ‘इसके बदले में, सुजाता होटल के निदेशक विनय कोचर और विजय कोचर ने पटना में अपनी बेशकीमती जमीन डीएमसीपीएल नाम की कंपनी को बहुत औने-पौने दाम पर हस्तांतरति कर दी। इस कंपनी का संचालन लालू प्रसाद के करीबी सहयोगी प्रेम चंद (पीसी) गुप्ता और उनकी पत्नी सरला गुप्ता करते थे।’ अदालत ने यह भी कहा कि बाद में सरला गुप्ता और अन्य लोगों ने इस कंपनी के शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को बहुत कम कीमत पर हस्तांतरित कर दिए।
लारा प्रोजेक्ट्स पर की टिप्पणी
अदालत ने कहा, ‘इस लगभग मुफ्त जमीन की देखरेख करने वाली नयी कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी है। इस बारे में पुख्ता संदेह है कि लालू प्रसाद ने अपने पद का दुरूपयोग करके अपनी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के लिए गैर-कानूनी तरीके से संपत्ति अर्जित की, और वे पटना के एक महंगे वाणिज्यिक इलाके में मौजूद इस जमीन को उपयोग में लाते रहे।’
पटना की जमीन को अपराध की आय से अर्जित संपत्ति बताया
अदालत ने कहा कि पटना स्थित यह जमीन अपराध की आय से अर्जित संपत्ति है और लारा प्रोजेक्ट्स, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद, पी.सी. गुप्ता, सरला गुप्ता, विजय कोचर और विनय कोचर के खिलाफ धन शोधन का आरोप तय किया जा सकता है।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ‘‘हालांकि, अदालत को आरोपी गौरव गुप्ता, नाथ मल काकरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, राजीव कुमार रेलन और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिले।
रवींद्रनाथ टैगोर को उद्धृत करते हुए न्यायाधीश ने यह कहा
आदेश सुनाने से पहले रवींद्रनाथ टैगोर को उद्धृत करते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जब भी सत्ता अपना रास्ता आसान बनाने के लिए अपने रास्ते से सभी रोक-टोक हटा देती है, तो वह जीत के जोश में अपनी बर्बादी की कहानी खुद लिखती है। उसे पता भी नहीं चलता और उसका नैतिक पतन हर दिन बढ़ता जाता है, और फिसलन भरा यह रास्ता ही उसकी बर्बादी का रास्ता बन जाता है।