नई दिल्ली. संसद के मानसून सत्र में परिसीमन (Delimitation) और विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Bill) को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है. एक तरफ जहां परिसीमन के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार FCRA बिल को पटल पर रखकर पारित कराने की रणनीति में जुटी है. इस जारी सियासी खींचतान के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित होकर विपक्ष के तमाम सवालों का बिंदुवार जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं.
FCRA विधेयक के कड़े प्रावधान और राष्ट्रीय सुरक्षा विदेशी फंडिंग नियमों में संशोधन का प्राथमिक उद्देश्य गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता लाना है. प्रस्तावित कानून के तहत स्वयंसेवी संस्थाओं के पंजीकरण, ऑडिट और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को अत्यधिक सख्त बनाया जा रहा है.
सरकार का स्पष्ट मत है कि जवाबदेही तय होने से विदेशी धन के संभावित दुरुपयोग को रोका जा सकेगा, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा को बल मिलेगा. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने इस बात पर जोर दिया है कि कानून का दायरा किसी विशेष धार्मिक या सामाजिक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होगा.
परिसीमन पर बढ़ता सियासी गतिरोध दूसरी ओर, परिसीमन का विषय संसद में भारी हंगामे की वजह बना हुआ है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दल सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं. विपक्ष का तर्क है कि राज्यों के प्रतिनिधित्व और सीमाओं के पुनर्निर्धारण से जुड़ी नीतियां व्यापक सहमति के बिना लागू नहीं की जानी चाहिए. इसके अतिरिक्त, दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई ने भी आग में घी डालने का काम किया है. विपक्षी सांसद गृह मंत्री की अनुपस्थिति और इन मुद्दों पर स्पष्टीकरण न मिलने को लेकर पिछले दो हफ्तों से लगातार सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं.
संसदीय गतिरोध समाप्त करने की ठोस पहल सदन के कामकाज को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने बीच का रास्ता निकालने का प्रयास शुरू किया है. संसदीय कार्य मंत्रालय ने विपक्ष के नेताओं के साथ संवाद स्थापित कर इस गतिरोध को खत्म करने की योजना पेश की है. इस रणनीति के तहत अमित शाह FCRA संशोधन बिल पर चर्चा की शुरुआत करने के साथ-साथ परिसीमन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष रखेंगे. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जंतर-मंतर घटनाक्रम की सुनवाई जारी रहने के बीच, सरकार विधायी प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध दिख रही है.
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