Bhuvneshwar. ओडिशा पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ने बालासोर जिले के एक जंगल से पांच ओरंगुटान बचाए जाने के बाद इस मामले की जांच तेज कर दी और इलाके में कथित रूप से देखी गई एक काली एसयूवी की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ताओं को आशंका है कि राज्य में इन जीवों की मौजूदगी के पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का हाथ हो सकता है।
बालासोर जिले से हाल में बचाए गए और यहां नंदनकानन प्राणी उद्यान में निगरानी में रखे गए पांच ओरंगुटान कई तरह की भावनाएं दिखा रहे हैं। इनमें चंचल व्यवहार, थोड़े समय के लिए मूड में बदलाव और घबराहट में एक-दूसरे से चिपके रहना शामिल है। चिड़ियाघर प्रशासन इसके मद्देनजर इन्हें तनावमुक्त रखने के लिए कई उपाय कर रहा है।
‘ओरंगुटान’ वानर प्रजाति का एक बड़ा जीव है। जांचकर्ता अब उस काली एसयूवी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसे कथित तौर पर सोमवार रात इलाके के बड़ापाही गांव के पास देखा गया था।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि एसटीएफ ने अब तक भोगराई और आसपास के दीघा इलाके में लगाए गए 55 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की है। चिड़ियाघर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को इन जीवों को धूप सेंकने के लिए उनके बाड़े से बाहर निकाला गया।
इन जीवों को वन विभाग के कर्मियों ने मंगलवार को बचाया था। अधिकारी ने बताया कि छह महीने से एक साल की उम्र के इन ओरंगुटान का व्यवहार मानव बच्चों जैसा दिखाई दे रहा है। पांचों ओरंगुटान में से तीन नर हैं और दो मादा हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘कभी-कभी वे शांत और सहज दिखाई देते हैं, लेकिन अगले ही पल एक-दूसरे से चिपक जाते हैं। संभवतः मां से अलग होने के कारण उनमें पैदा हुई चिंता की वजह से वे ऐसा कर रहे हैं।’’



