टूरिस्टों को होगी परेशानी, बाहरी दोपहिया वाहनों पर ₹100 का वसूला जायेगा प्रवेश शुल्क
नैनीताल. उत्तराखंड की प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल में घूमना अब पर्यटकों के लिए पहले से कहीं अधिक महंगा हो गया है. नगर पालिका परिषद द्वारा शहर की चुंगियों (टोल टैक्स) का संचालन एक नए ठेकेदार को सौंपे जाने के बाद से एक नया विवाद खड़ा हो गया है.
नई व्यवस्था के तहत अब जिले के बाहर से आने वाले दोपहिया वाहनों (बाइक और स्कूटर) से ₹100 का प्रवेश शुल्क (एंट्री टैक्स) वसूलना शुरू कर दिया गया है. यह नया नियम बुधवार रात 12 बजे से प्रभावी हुआ, और गुरुवार सुबह से ही फासी गधेरा चुंगी पर पर्यटकों से धड़ल्ले से वसूली शुरू हो गई, जिसके बाद पहले ही दिन करीब 100 बाहरी दोपहिया वाहनों से टैक्स वसूला गया.
नियमों का चौतरफा विरोध और चुंगी पर हंगामा
इस नई टैक्स व्यवस्था के लागू होते ही पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और अधिवक्ताओं (वकीलों) में भारी नाराजगी देखी जा रही है. गुरुवार सुबह जब चुंगी पर शुल्क वसूली शुरू हुई, तो कई वाहन चालकों ने दोपहिया वाहनों पर टैक्स लगाने के फैसले पर कड़ा विरोध जताया.
इसी दौरान टैक्स कर्मियों और एक स्थानीय अधिवक्ता के बीच तीखी बहस हो गई. मामला बढ़ता देख बार एसोसिएशन के सदस्य भी मौके पर पहुंच गए और करीब एक घंटे तक चुंगी पर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि बिना किसी पर्याप्त पूर्व सूचना और स्पष्ट नीति के इस तरह की मनमानी वसूली पूरी तरह अनुचित है.
“क्या अब पैदल चलने का भी टैक्स लगेगा?” – पर्यटकों का फूटा गुस्सा
बाहर से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने इस टैक्स को जेब पर अतिरिक्त बोझ बताया है. रुद्रपुर से नैनीताल घूमने आए एक पर्यटक रोहित ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि चारपहिया वाहनों से शुल्क लेना तो समझ आता है, लेकिन मध्यमवर्गीय बाइक सवारों से ₹100 वसूलना सरासर गलत है. इससे पर्यटकों में नाराजगी बढ़ेगी और नैनीताल के पर्यटन व्यवसाय पर बुरा असर पड़ेगा.
वहीं, सातताल में रहने वाले अमित (जिनकी बाइक का नंबर यूके-06 है) को भी नैनीताल में प्रवेश के लिए ₹100 चुकाने पड़े. उन्होंने पालिका प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा, “ऐसा लग रहा है कि आने वाले समय में ये लोग पैदल चलने पर भी टैक्स लगा देंगे.
” स्थानीय निवासियों का यह भी आरोप है कि देश में शायद ही कोई ऐसा पर्यटन स्थल होगा जहाँ दोपहिया वाहनों से इतना भारी प्रवेश शुल्क लिया जाता हो. यदि कोई व्यक्ति काम के सिलसिले में दिन में दो बार शहर आता-जाता है, तो उसे ₹200 सिर्फ टैक्स में देने होंगे.
प्रशासन और ठेकेदार का पक्ष
इस पूरे हंगामे पर टोल टैक्स कर्मी राघव ने आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह वसूली पूरी तरह से नगर पालिका परिषद नैनीताल की निर्धारित शर्तों और अनुबंध के नियमों के तहत की जा रही है.
उन्होंने बताया कि नैनीताल के स्थानीय वाहनों (यूके-04 नंबर) को इस शुल्क से पूरी तरह छूट दी गई है. इसके अलावा, यदि कोई नैनीताल का मूल निवासी है और उसके पास दूसरे जिले के नंबर की गाड़ी है, तो वह अपना आधार कार्ड या वैध दस्तावेज दिखाकर इस टैक्स से छूट पा सकता है.
फिलहाल, इस बढ़े हुए टैक्स को लेकर शहर में तनाव का माहौल है. जहाँ एक तरफ पालिका इसे राजस्व और नियमों का हवाला देकर जायज ठहरा रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय व्यापार मंडल और पर्यटक इसे तुरंत वापस लेने या इस पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं.
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