भुवनेश्वर. उड़ीसा के पावन धाम पुरी में भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा की शुरुआत बेहद हर्षोल्लास और भक्तिमय माहौल में हुई. ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरे कृष्ण’ के जयघोष, शंखध्वनि और झांझ-मंजीरों की थाप के बीच महाप्रभु के रथों को खींचने के लिए आस्था का ऐसा समंदर उमड़ा कि पुरी की सड़कें छोटी पड़ गईं.
इस भव्य धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से आए करीब 10 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए. भक्ति के इस महाकुंभ में जहां चारों ओर आस्था का अनूठा रंग देखने को मिल रहा था, वहीं गुरुवार को एक बड़े हादसे ने इस उत्सव में मातम पसरा दिया. रथ खींचने के दौरान अत्यधिक भीड़ के कारण दम घुटने से दो श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 250 से ज्यादा लोग घायल हो गए.
भक्ति का महासंगम: जब जन-जन में रमे जगन्नाथ
गुरुवार दोपहर को जैसे ही महाप्रभु जगन्नाथ का रथ ‘नंदीघोष’, बड़े भाई बलभद्र का ‘तालध्वज’ और देवी सुभद्रा का ‘दर्पदलन’ सिंहद्वार से बाहर आए, पूरी नगरी पूरी तरह से भक्ति रस में डूब गई.
धार्मिक परंपरा का निर्वहन: परंपरा के अनुसार, पुरी के गजपति महाराज ने सोने की झाड़ू से रथों के सामने ‘छेरा पहरा’ (पवित्र बुहारने की रस्म) की रस्म पूरी की.
शाम को मौसीबाड़ी प्रस्थान: शाम करीब 5:25 बजे महाप्रभु के रथों को खींचना शुरू किया गया. भारी सुरक्षा व्यवस्था और लाखों हाथों के सहारे भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रात 7:15 बजे अपनी मौसी के घर यानी ‘गुंडिचा मंदिर’ (मौसीबाड़ी) पहुंचे.
मौसम की मेहरबानी: इस बार लगातार तीसरे साल रथयात्रा के मुख्य दिन पुरी में बारिश नहीं हुई, जिससे भीषण उमस और गर्मी के बावजूद भक्तों का उत्साह चरम पर रहा. उड़ीसा के गवर्नर और मुख्यमंत्री ने भी खुद उपस्थित होकर भगवान के धर्म रथ को खींचा और आशीर्वाद लिया.
भीड़ का महादबाव: दम घुटने से 2 की मौत, 250 से ज्यादा घायल
लाखों की तादाद में पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को संभालना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुआ. रथयात्रा के दौरान ग्रैंड रोड (बड़ा डांड) पर अचानक भीड़ का दबाव बेहद बढ़ गया, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो गई.
हादसे की मुख्य बातें:
रथयात्रा के दौरान मची आपाधापी में अत्यधिक भीड़ और उमस के चलते कई लोग जमीन पर गिर गए. दम घुटने के कारण तत्काल दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई.
पुलिस प्रशासन के मुताबिक, मृतकों में से एक व्यक्ति की पहचान कटक के मूल निवासी के रूप में की गई है, जबकि दूसरे की शिनाख्त की कोशिशें जारी हैं.
भीड़ के इस रेले में दबने, गिरने और बेहोश होने के कारण 250 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हो गए. घायलों को तुरंत पुरी के स्थानीय अस्पतालों और एम्बुलेंस के जरिए चिकित्सा शिविरों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है.
पुरी में आस्था का कॉरिडोर और सुरक्षा इंतजाम
इस भव्य आयोजन के लिए उड़ीसा सरकार और स्थानीय प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे. पुरी में आस्था कॉरिडोर को सुरक्षित रखने के लिए हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी. हालांकि, 10 लाख से ज्यादा लोगों की अप्रत्याशित मौजूदगी के कारण रथ के ठीक आगे और पीछे चल रहे जनसैलाब को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो गया. हादसे के तुरंत बाद प्रशासनिक अमले और स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाला और स्थिति को संभाला, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया.
पुरी की यह रथयात्रा जहां एक ओर अटूट श्रद्धा, दिव्य संस्कृति और भाईचारे का अनूठा संदेश दे गई, वहीं दो श्रद्धालुओं की मौत ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन की आस में आए इन भक्तों की मौत ने पुरी से लेकर पूरे देश के श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया है. भगवान जगन्नाथ से यही प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें.
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