इंस्टाग्राम पर हुई एक फर्जी दोस्ती ने एक नाबालिग किशोरी की जिंदगी को तीन महीनों के लिए किसी बुरे सपने में तब्दील कर दिया. ऑनलाइन बातचीत से शुरू हुआ यह सिलसिला ब्लैकमेलिंग, मानसिक उत्पीड़न और अमानवीय शारीरिक यातनाओं की हद तक पहुंच गया था.
नागपुर. सोशल मीडिया के दौर में अनजान लोगों पर भरोसा करना कितना जानलेवा साबित हो सकता है, इसका एक बेहद चिंताजनक और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला महाराष्ट्र के नागपुर से सामने आया है. यहां इंस्टाग्राम पर हुई एक फर्जी दोस्ती ने एक नाबालिग किशोरी की जिंदगी को तीन महीनों के लिए किसी बुरे सपने में तब्दील कर दिया. ऑनलाइन बातचीत से शुरू हुआ यह सिलसिला ब्लैकमेलिंग, मानसिक उत्पीड़न और अमानवीय शारीरिक यातनाओं की हद तक पहुंच गया.
सोशल मीडिया पर बुना गया छल का जाल
मामले की शुरुआत एक फर्जी इंस्टाग्राम प्रोफाइल से हुई. ठाणे निवासी आरोपी ने अपनी असली पहचान छुपाकर 16 वर्षीय किशोरी से संपर्क साधा. धीरे-धीरे बातचीत बढ़ाकर उसने लड़की का भरोसा जीता. इसके बाद, आरोपी ने किशोरी को झांसे में लेकर उसकी कुछ निजी और संवेदनशील तस्वीरें हासिल कर लीं. इन्हीं तस्वीरों को उसने आगे चलकर पीड़िता को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने का सबसे बड़ा हथियार बना लिया.
डिजिटल अरेस्ट और ब्लैकमेलिंग का डर
निजी सामग्री हाथ में आते ही आरोपी ने पीड़िता को डराना-धमकाना शुरू कर दिया. उसने लड़की को सामाजिक बदनामी का भय दिखाया और धमकी दी कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई, तो वह तस्वीरों को इंटरनेट पर वायरल कर देगा. इस डर का फायदा उठाकर आरोपी ने पीड़िता को ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी स्थिति में रखा. वह लगातार वीडियो कॉल और मोबाइल एक्सेस के माध्यम से पीड़िता की हर पल की गतिविधि पर निगरानी रखने लगा और उससे अपनी हर अनुचित शर्त मनवाने लगा. बदनामी के खौफ से किशोरी कई हफ्तों तक इस मानसिक कैद में घुटती रही.
बंधक बनाकर शारीरिक व अमानवीय अत्याचार
मानसिक प्रताड़ना के बाद आरोपी का दुस्साहस और बढ़ गया. उसने धमकी देकर पीड़िता को नागपुर स्थित अपने किराए के ठिकाने पर बुलाया और वहां उसे बंधक बना लिया. इस दौरान उसने क्रूरता की तमाम सीमाएं लांघ दीं. आरोपी ने न केवल पीड़िता के साथ बार-बार दुष्कर्म किया, बल्कि उसे चमड़े के बेल्ट और जानवरों के पट्टे (डॉग स्ट्रैप) से बुरी तरह पीटा. इतना ही नहीं, पीड़िता के शरीर पर चाकू से दर्जनों घाव किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गई.
रेस्क्यू और पुलिस की कार्रवाई
पीड़िता के गायब होने और मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए ठिकाने का पता लगाया और 3 अगस्त को छापेमारी कर किशोरी को उस खौफनाक कैद से मुक्त कराया. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और मामले में प्रयुक्त सामान की दुकानदारों से पूछताछ कर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं.
यह घटना अभिभावकों और युवाओं के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि इंटरनेट पर अनजान लोगों से सतर्क रहना और समय रहते आवाज उठाना कितना आवश्यक है.


