JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता दिवस पर राजधानी रांची में विशाल ‘तिरंगा यात्रा’ का आयोजन किया. छात्र प्रतिनिधि देवेंद्र नाथ महतो को प्रशासन ने सदर अस्पताल से बाहर आने की इजाजत नहीं दिया. इसे लेकर छात्रों में आक्रोश है.
रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने विरोध का दायरा विस्तृत करने का निर्णय लिया है. JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता दिवस पर राजधानी रांची में विशाल ‘तिरंगा यात्रा’ का आयोजन किया. 22 दिनों से जारी इस सत्याग्रह के दौरान छात्रों ने घोषणा की है कि 20 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सरकारी आवास का घेराव किया जाएगा. इसके अतिरिक्त, राज्य के सभी 24 जिलों में सत्ताधारी झामुमो और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के पुतले दहन की योजना बनाई गई है.
छात्र नेता देवेंद्र महतो को अस्पताल से बाहर निकलने से रोका गया
सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे छात्र प्रतिनिधि देवेंद्र नाथ महतो को प्रशासन द्वारा सदर अस्पताल से बाहर आने की इजाजत नहीं दी गई. स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए पुलिस बल ने अस्पताल परिसर के बाहर कड़ा पहरा लगा दिया. जब देवेंद्र महतो ने तिरंगा यात्रा में सम्मिलित होने का प्रयास किया, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया. इस दौरान उनके समर्थकों और पुलिस के बीच काफी तीखी बहस और हाथापाई हुई. समर्थकों का आरोप है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए देवेंद्र को जबरन रोककर रखा गया, जबकि चिकित्सक उन्हें डिस्चार्ज करने के पक्ष में थे.
सरकार और कांग्रेस पर वादाखिलाफी का आरोप
मंच के प्रतिनिधियों का कहना है कि तीन चरणों की वार्ता के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मुख्यमंत्री अभ्यर्थियों की मांगों पर अविलंब संज्ञान नहीं लेते हैं, तो कांग्रेस पार्टी को हेमंत सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए. भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों की गिरती स्थिति और प्रशासनिक उदासीनता को देखते हुए छात्रों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन राज्यव्यापी प्रशासनिक गतिरोध का रूप धारण कर सकता है.


