दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर व पलक्कड़ जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे का हैदराबाद, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला, तथा पूर्वी रेलवे का मधुपुर स्टेशन पर लगे वाटर कूलर में हानिकारक ‘ई-कोली’ (E. coli) बैक्टीरिया पाया गया है.
नई दिल्ली. हाल ही में सार्वजनिक हुई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने देश के रेल यात्रियों की सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. संसद के पटल पर रखी गई इस समीक्षा में खुलासा हुआ है कि रेलवे बोर्ड द्वारा बनाए गए सुरक्षा मानकों और स्वच्छता संबंधी नियमों की विभिन्न जोनों द्वारा सरेआम अनदेखी की जा रही है, जिससे यात्रियों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है.
दूषित जल का जानलेवा खतरा
समीक्षा के दौरान देश भर के लगभग 512 रेलवे स्टेशनों का गहन निरीक्षण किया गया. इसके निष्कर्ष बेहद डरावने हैं विभिन्न जोनों के कई प्रमुख स्टेशनों पर वाटर कूलरों से उपलब्ध कराए जा रहे पीने के पानी में हानिकारक ‘ई-कोली’ (E. coli) बैक्टीरिया पाया गया है.
प्रभावित स्टेशन: दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर व पलक्कड़ जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे का हैदराबाद, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला, तथा पूर्वी रेलवे का मधुपुर स्टेशन शामिल हैं.
जांच में लापरवाही: रिपोर्ट में यह उजागर हुआ कि छह अलग-अलग रेल जोनों के कम से कम 59 स्टेशनों पर पेयजल की आवश्यक बैक्टीरियोलॉजिकल जांच तक नहीं कराई गई, जो यात्रियों के स्वास्थ्य के प्रति प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है.
बुनियादी सुविधाओं का बुरा हाल
पेयजल के अलावा स्टेशनों पर उपलब्ध अन्य जनसुविधाओं की स्थिति भी अत्यंत निराशाजनक पाई गई:
शौचालयों और मूत्रालयों में गंदगी: देश के प्रमुख जंक्शनों पर स्वच्छता और साफ-सफाई का स्तर चिंताजनक रूप से नीचे गिर चुका है.
यात्री सुविधाओं में कमी: सीएसएमटी, हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल जैसे व्यस्ततम स्टेशनों पर बैठने के उचित इंतजाम, पर्याप्त कूड़ेदान और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन सूचना बोर्ड की भारी कमी देखी गई.
संसाधनों का अभाव: जांच में 12 स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था, आठ स्टेशनों पर वाटर कूलर एवं पंखों की सुचारू उपलब्धता तथा पांच स्टेशनों पर आवश्यक दिशा-सूचक बोर्डों की स्पष्ट अनुपस्थिति दर्ज की गई.
कैग ने स्पष्ट किया कि इस ऑडिट का मुख्य उद्देश्य रेलवे बोर्ड के दिशानिर्देशों के जमीनी क्रियान्वयन का मूल्यांकन करना था, जिसमें विफलता साफ झलकती है.


