रांची. झारखंड के प्रशासनिक और पुलिस महकमे से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में मानव संपदा पोर्टल लंबे समय से बंद रहने के कारण लगभग 1000 पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की पदोन्नति (प्रमोशन) का रास्ता फंस गया है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए आज विकास आयुक्त अजय कुमार की अध्यक्षता में एक अहम उच्चस्तरीय समिति की बैठक होने जा रही है, जिस पर प्रदेशभर के अधिकारियों की निगाहें टिकी हुई हैं।
क्या है पूरा मामला?
नियमों के अनुसार, सरकारी अधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों को अपनी चल-अचल संपत्ति की वार्षिक घोषणा करनी होती है, जिसके लिए मानव संपदा पोर्टल का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यह पोर्टल बंद होने के कारण राज्य के करीब 300 पुलिस अधिकारी और बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी अपनी संपत्ति का ब्योरा ऑनलाइन दर्ज नहीं कर पाए हैं। संपत्ति की घोषणा न होने की वजह से हाल ही में होने वाली प्रोन्नति समिति की बैठकों में इन अधिकारियों के नामों पर विचार नहीं हो पा रहा है, जिससे उनके करियर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
वित्त मंत्री की दखल और समिति का गठन
इस मामले को लेकर राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर भी पूरी तरह मुखर नजर आए हैं। उन्होंने पहले ही कार्मिक विभाग को यह सुझाव दिया था कि पोर्टल बंद रहने से कोई वित्तीय नुकसान नहीं है, इसलिए इसे हर तीन महीने में एक सप्ताह के लिए खोला जाना चाहिए, ताकि छूटे हुए अधिकारी अपनी संपत्ति का विवरण दे सकें।
कार्मिक सचिव द्वारा पोर्टल खोलने में असमर्थता जताए जाने पर वित्त मंत्री ने मुख्य सचिव अविनाश कुमार को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। मुख्य सचिव ने इसी पत्र का संज्ञान लेते हुए विकास आयुक्त अजय कुमार, राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव चंद्रशेखर और कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो को शामिल करते हुए एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
आगे की राह क्या होगी?
आज होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में यदि इस तकनीकी समस्या का कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो झारखंड पुलिस एसोसिएशन सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाने की तैयारी में है। राज्य के प्रशासनिक और पुलिस हलकों में इस बात की पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि आज की इस बैठक के बाद हजारों अधिकारियों के प्रमोशन का अटका हुआ रास्ता साफ हो जाएगा।


