पटना. बिहार के प्रशासनिक गलियारों से एक बार फिर भ्रष्टाचार की एक और सनसनीखेज दास्तान सामने आई है। राज्य में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर शिकंजा कसते हुए दानापुर की अवर निबंधक (Sub-Registrar) कुमारी स्वीटी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) की छापेमारी के दौरान मिले अवैध संपत्ति और अकूत काली कमाई के सबूतों के बाद यह बड़ी विभागीय कार्रवाई की गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा भ्रष्टाचार का मामला तब उजागर हुआ जब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने दानापुर की अवर निबंधक कुमारी स्वीटी और उनके पति रविन्द्र कुमार दिवाकर के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। रविन्द्र कुमार दिवाकर खुद पटना में अपर समाहर्ता (आपूर्ति) के रूप में तैनात हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस असरदार अफसर दंपती पर अपनी वैध आय से लगभग एक करोड़ छह लाख 85 हजार 900 रुपये से अधिक की संपत्ति अवैध रूप से अर्जित करने का गंभीर आरोप है। निगरानी ब्यूरो ने इस मामले में 25 सितंबर को निगरानी थाना कांड संख्या 113/26 दर्ज किया था।
छापेमारी में खुले भ्रष्टाचार के राज
जब निगरानी टीम ने भ्रष्ट अधिकारियों के ठिकानों पर दबिश दी, तो वहां से जो खुलासे हुए उसने सबको चौंका दिया। तलाशी के दौरान अधिकारियों के पास से करीब 70 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा घर से भारी मात्रा में सोने-चांदी के गहने, कई महंगी ब्रांडेड घड़ियां और दानापुर इलाके में दो फ्लैट होने के पुख्ता कागजात भी हाथ लगे। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण था कि कैसे जनता के हक और सरकारी पद की आड़ में भ्रष्टाचार का साम्राज्य खड़ा किया जा रहा था।
स्पष्टीकरण का जवाब न देना पड़ा भारी
भ्रष्टाचार के इन पुख्ता सबूतों के मिलने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया। कुमारी स्वीटी का यह आचरण ‘बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976’ के नियम-3 के पूरी तरह प्रतिकूल पाया गया। इसके बाद विभाग द्वारा पिछले साल अक्टूबर महीने में उनसे आधिकारिक तौर पर स्पष्टीकरण की मांग की गई थी। लेकिन आरोपी अधिकारी की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया।
अंततः नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के पुख्ता मामलों को देखते हुए ‘बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005’ के तहत उन्हें निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकास भवन, पटना निर्धारित किया गया है, जहां उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। वहीं, प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए फतुहा के अवर निबंधक पप्पू कुमार को दानापुर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह कार्रवाई भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है।


