जमशेदपुर. लौहनगरी जमशेदपुर की हर छोटी-बड़ी खबर और शहर की धड़कनों को पिछले ढाई दशकों से अपने कैमरे में कैद करने वाले वरिष्ठ प्रेस छायाकार पार्थो चक्रवर्ती का भुइयांडीह स्थित बर्निंग घाट पर नम आंखों से अंतिम संस्कार किया गया. उनके छोटे भाई मिथुन चक्रवर्ती ने मुखाग्नि देकर अंतिम रस्म अदा की. गुरुवार तड़के टाटा मोटर्स अस्पताल में हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) से 52 वर्षीय पार्थो चक्रवर्ती का निधन हो गया था. उनकी अंतिम यात्रा में शहर के तमाम पत्रकारों, छायाकारों, राजनीतिक हस्तियों और स्थानीय लोगों ने शामिल होकर अपने प्रिय ‘पार्थो दा’ को अंतिम विदाई दी.
25 वर्षों तक कैमरे में दर्ज की लौहनगरी की धड़कन
सीतारामडेरा की ईस्ट बंगाल कॉलोनी के रहने वाले पार्थो चक्रवर्ती बीते 25 से अधिक वर्षों से सक्रिय फोटोपत्रकारिता कर रहे थे. अंग्रेजी दैनिक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ समेत विभिन्न प्रमुख समाचार-पत्रों के माध्यम से उन्होंने शहर की महत्वपूर्ण राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को दृश्यों में पिरोया. घटनास्थल पर समय से पहुंचने और अपने काम के प्रति असाधारण समर्पण के कारण वे पूरे मीडिया जगत में अपनी अलग पहचान रखते थे. प्यार से हर कोई उन्हें “पार्थो दा” कहकर पुकारता था.
परिजनों पर टूटा दुखों का पहाड़
पार्थो चक्रवर्ती अपने पीछे वृद्ध पिता रंजीत चक्रवर्ती, माता शिला चक्रवर्ती और दो छोटे भाइयों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. उनके अचानक और असमय चले जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
पत्रकारिता जगत और शहरवासियों में शोक
प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है. वरिष्ठ पत्रकारों और साथियों ने उन्हें एक बेहद कर्मठ, सरल और हंसमुख इंसान के रूप में याद किया. कैमरे के पीछे की वह खामोश आवाज भले ही अब हमेशा के लिए शांत हो गई हो, लेकिन उनके द्वारा खींची गई तस्वीरें और शहर की अनगिनत स्मृतियां हमेशा उनकी मौजूदगी का अहसास कराती रहेंगी.


