रांची/जमशेदपुर. झारखंड उच्च न्यायालय ने 730 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित जीएसटी (GST) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमशेदपुर के कारोबारी विक्की भालोटिया उर्फ अमित अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज कर दी है. इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष अदालत ने भी आरोपी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसके आदेश को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाई कोर्ट का रुख किया था.
फर्जी चालान और इनपुट टैक्स क्रेडिट का बड़ा खेल
यह पूरा मामला शेल (फर्जी) कंपनियों के नाम पर फर्जी जीएसटी एंट्री और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है. जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने आपस में मिलकर करीब 14,325 करोड़ रुपये के फर्जी चालान तैयार किए थे. इन फर्जी चालानों के आधार पर 730 करोड़ रुपये से अधिक का अयोग्य इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा चूना लगा.
90 से अधिक शेल कंपनियों का नेटवर्क
ईडी और जीएसटी इंटेलिजेंस की जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए 90 से अधिक शेल कंपनियों का एक जटिल नेटवर्क खड़ा किया गया था. इन्हीं फर्जी कंपनियों के जरिए बिलिंग का चक्र चलाकर अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया जाता था. ईडी फिलहाल इस पूरे सिंडिकेट और इससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के तमाम पहलुओं की जांच कर रही है.
कई अन्य आरोपी भी जेल में
जीएसटी अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई के बाद अधिकारी दिनेश सिंह के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया था. ईडी ने अपनी जांच के दौरान जमशेदपुर के जुगसलाई निवासी विक्की भालोटिया के अलावा शिव कुमार देवड़ा, मोहित देवड़ा, सुमित गुप्ता और कोलकाता के व्यापारी अमित गुप्ता सहित कई अन्य मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है.
मनी लॉन्ड्रिंग के एक अन्य मामले में फैसला सुरक्षित
इसी दौरान, झारखंड हाई कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक अन्य मामले में मेसर्स जील इंडिया केमिकल्स (रांची) के प्रोपराइटर अजय जालान की याचिका पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. जालान ने ईडी कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज करने और आरोप तय करने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. यह मामला मेकॉन (MECON) के वरिष्ठ प्रबंधक द्वारा पद का दुरुपयोग कर कार्यादेश दिलाने के बदले 1.65 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने से जुड़ा हुआ है.


