नई दिल्ली. देश के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों में से एक नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई पर अदालत ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. दिल्ली की राउज एवेन्यू विशेष अदालत ने सीबीआई द्वारा दाखिल 20,000 पन्नों के विशालकाय आरोपपत्र का संज्ञान ले लिया है. विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने इस मामले के 13 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने (Charge Framing) की प्रक्रिया पर बहस शुरू करने का निर्देश दिया है.
बिना चेकिंग बाहर निकले विशेषज्ञ, ऐसे रचा गया खेल
सीबीआई की जांच में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सुरक्षा प्रणाली की धज्जियां उड़ने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. चार्जशीट के मुताबिक, एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञों ने दिल्ली स्थित कार्यालय के गोपनीय कक्ष से ही प्रश्नपत्र के सवालों को लीक किया था. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गोपनीय स्थान से बाहर निकलते समय इन विशेषज्ञों की कोई शारीरिक तलाशी (Frisking) नहीं ली गई, जिसका फायदा उठाकर इन्होंने आसानी से पेपर बाहर पहुंचा दिया. सीबीआई ने इस मामले में मुख्य सूत्रधार एनटीए विशेषज्ञ पी.वी. कुलकर्णी, मनीषा संजय हवलदार और मनीषा गुरुनाथ मंधारे को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा राजस्थान, गुरुग्राम, नासिक और पुणे से अन्य मददगारों (मांगीलाल, दिनेश, विकास बिवाल, यश यादव, शुभम खैरनार आदि) को दबोचा गया.
मीडिया लीक और नाबालिग गवाहों के नाम छपने पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान विशेष अदालत ने आरोपपत्र के तथ्य और नाबालिग गवाहों की पहचान मीडिया में सार्वजनिक होने पर सख्त रुख अपनाया. अदालत ने इस पर गहरी नाराजगी और आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जो तथ्य अभी तक औपचारिक रूप से अदालत के सामने पेश भी नहीं किए गए हैं, वे अखबारों में छप रहे हैं. पीठ ने टिप्पणी की कि जिम्मेदार मीडिया को ऐसे संवेदनशील तथ्यों को उजागर करने से बचना चाहिए.
सीबीआई और बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया कि मीडिया में लगातार चार्जशीट के हिस्से और गवाहों के नाम लीक होने से केस के निष्पक्ष मीडिया ट्रायल पर बुरा असर पड़ सकता है. बचाव पक्ष का आरोप था कि कोर्ट में चार्जशीट पेश होने से पहले ही उसकी प्रतियां मीडिया के पास मौजूद थीं. इस पर न्यायाधीश ने आश्वासन दिया कि वे समाचार रिपोर्टों की जांच करेंगे और नियमानुसार आवश्यक कानूनी कदम उठाएंगे.


