नई दिल्ली. लोकतांत्रिक व्यवस्था में ‘कानून का राज’ (Rule of Law) केवल एक प्रशासनिक सिद्धांत नहीं, बल्कि संवैधानिक सीमाओं का पालन और निष्पक्षता का सीधा आचरण है. इसका मूल आधार यही है कि कानून की नज़र में हर व्यक्ति समान है चाहे वह अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहा हो या कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक तंत्र. नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में काकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर दिल्ली पुलिस का कड़ा फैसला इसी कानूनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.
शांतिपूर्ण असहमति का अधिकार बनाम उपद्रव
भारतीय संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठाने और असहमति दर्ज कराने का मौलिक अधिकार देता है. हालांकि, यह अधिकार सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या अराजकता फैलाने की छूट नहीं देता. दिल्ली पुलिस मुख्यालय में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रदर्शन की आड़ में उपद्रव मचाने और सुरक्षा बलों पर हमला करने वाले तत्वों के खिलाफ दर्ज 21 एफआईआर में से एक भी वापस नहीं ली जाएगी.
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी. हालांकि, कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले उपद्रवियों को राहत देना ‘कानून के राज’ की मूल भावना के विपरीत होगा.
अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी: निष्पक्ष जांच का आश्वासन
CJP नेतृत्व की ओर से मुकदमे वापस लेने की मांग और दी जा रही चेतावनियों के बीच पुलिस प्रशासन ने स्थिति साफ की है. नई दिल्ली जिले के पांच प्रमुख थानों कनॉट प्लेस, संसद मार्ग, बाराखंभा रोड, मंदिर मार्ग, कर्तव्य पथ—तथा स्पेशल सेल की आईएफएसओ (IFSO) यूनिट में दर्ज सभी 21 प्राथमिकियां ‘अज्ञात उपद्रवियों’ के खिलाफ पंजीकृत हैं. इनमें किसी भी छात्र का नाम शामिल नहीं है.
जांच अधिकारियों के अनुसार, जब तक निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती और किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता के ठोस सबूत नहीं मिलते, तब तक किसी को दोषी नहीं माना जाएगा. निर्दोष विद्यार्थियों को पूर्ण सुरक्षा दी जाएगी, जबकि साक्ष्यों के आधार पर हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति की क्षति
20 से 25 जुलाई के दौरान जंतर-मंतर, संसद मार्ग, जनपथ और टॉलस्टॉय मार्ग जैसे अति-संवेदनशील इलाकों में हुई घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे. इस दौरान 100 से अधिक पुलिस बैरिकेड तोड़े गए, 16 सरकारी व निजी वाहनों को क्षतिग्रस्त किया गया और गश्त पर तैनात अधिकारियों व कर्मियों पर पथराव हुआ.
दर्ज प्राथमिकियों में आपराधिक षड्यंत्र, दंगा भड़काने, महिला पत्रकारों से अभद्रता, अनधिकृत ड्रोन उड़ाने और संपत्ति चोरी जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं. वीडियो फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों से यह बात भी सामने आई है कि मंच का इस्तेमाल आपराधिक पृष्ठभूमि वाले तत्वों द्वारा किया गया.
‘कानून का राज’ यह सुनिश्चित करता है कि जन-आंदोलनों की आड़ में अपराध करने वालों को कोई संरक्षण न मिले. पारदर्शी जांच और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई ही लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख और समाज में न्याय की स्थापना को सुदृढ़ करती है.
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