चाईबासा. उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है. आयोग ने सहारा समूह से संबद्ध ‘हमारा इंडिया क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड’ को सेवा में गंभीर कोताही और अनुचित व्यापार आचरण का दोषी ठहराया है. मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने संस्था को निर्देश दिया है कि वह पीड़िता के कानूनी उत्तराधिकारी को ₹5,85,425 का भुगतान 45 दिनों के भीतर सुनिश्चित करे.
क्या है पूरा मामला?
यह प्रकरण चाईबासा के गुटुसाई निवासी कृष्णा चटर्जी से संबंधित है. प्राप्त जानकारी के अनुसार:
- निवेश विवरण: कृष्णा चटर्जी की स्वर्गीय माता, पुतुल चटर्जी ने 28 जून 2019 को सोसाइटी की एक जमा योजना में ₹3,63,000 का निवेश किया था.
- परिपक्वता अवधि: इस निवेश की परिपक्वता तिथि 28 जून 2024 तय की गई थी, जिसमें कृष्णा चटर्जी को नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) बनाया गया था.
- भुगतान में अड़चन: परिपक्वता अवधि पूर्ण होने से पूर्व ही 12 फरवरी 2024 को पुतुल चटर्जी का देहांत हो गया. इसके बाद जब नामांकित पुत्र ने जमा राशि और ब्याज के दावे हेतु संपर्क किया, तो संस्था द्वारा केवल शुरुआती तीन महीनों में ₹3,328 की मासिक ब्याज राशि का भुगतान किया गया और इसके बाद भुगतान बंद कर दिया गया.
लगातार पत्राचार और आग्रह के बावजूद जब सोसाइटी ने राशि लौटाने से मना कर दिया, तब पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया.
आयोग का एकतरफा आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने 21 अक्टूबर 2025 को विपक्षी संस्था को नोटिस जारी किया था. बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद सहारा समूह की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ. इसके पश्चात, आयोग ने 21 जनवरी 2026 को मामले में एकतरफा (Ex-Parte) कार्रवाई करने का निर्णय लिया.
उपलब्ध बॉन्ड, बैंक पासबुक, मृत्यु प्रमाण पत्र और साक्ष्यों का गहन अध्ययन करने के बाद आयोग ने माना कि जमाकर्ता की राशि समय पर न लौटाना सेवा में गंभीर त्रुटि है.
भुगतान का ब्योरा:
आयोग द्वारा तय की गई ₹5,85,425 की कुल देय राशि में निम्नलिखित घटक शामिल हैं:
- मूलधन: ₹3,63,000
- बकाया ब्याज (10% वार्षिक दर से 57 माह का): ₹1,72,425
- मानसिक प्रताड़ना व क्षतिपूर्ति: ₹40,000
- मुकदमा खर्च: ₹10,000
आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित 45 दिनों की सीमा के भीतर संस्था द्वारा भुगतान नहीं किया जाता है, तो निर्णय की तिथि से मूलधन एवं ब्याज की राशि पर 9% वार्षिक दर से अतिरिक्त ब्याज भी चुकाना होगा.


