सरकार के ऐतिहासिक कदम से जीवनरक्षक कैंसर दवाओं की खुदरा कीमतों में भारी कमी आने की उम्मीद है, जिससे मरीजों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी. नयी कीमतें 9 नवंबर से लागू होंगी.
नई दिल्ली: देश के कैंसर मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है. दवा मूल्य नियामक संस्था राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 137 गैर-अनुसूचित दवाओं पर व्यापार मार्जिन (Profit Margin) को अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है.
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था आगामी 9 नवंबर से पूरे देश में सख्ती से लागू कर दी जाएगी. इस ऐतिहासिक कदम से जीवनरक्षक कैंसर दवाओं की खुदरा कीमतों में भारी कमी आने की उम्मीद है, जिससे मरीजों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी.
क्या है नया नियम और कैसे घटेगी कीमतें?
वर्तमान मूल्य संरचना के विश्लेषण से पता चलता है कि कई मामलों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं पर अत्यधिक मुनाफा वसूला जाता था, जिससे मरीजों पर इलाज का भारी वित्तीय बोझ पड़ता था. एनपीपीए ने राजपत्र में अधिसूचना जारी कर औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के अनुच्छेद 19 के तहत व्यापार मार्जिन युक्तिकरण (TMR) व्यवस्था को लागू किया है. इस नियंत्रण के बाद, खुदरा कीमतों में मौजूदा संरचना के आधार पर 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आने की पूरी संभावना है.
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर लिया गया फैसला
यह नीतिगत निर्णय स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के अंतर्गत गठित एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है. इस समिति में देश भर के प्रतिष्ठित कैंसर विशेषज्ञ, प्रमुख चिकित्सा पेशेवर, अस्पतालों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल थे. व्यापक विचार-विमर्श और मरीजों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समिति ने इन 137 दवाओं को इस दायरे में लाने की सिफारिश की थी. सरकार द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि जरूरत के मुताबिक इस सूची को समय-समय पर अपडेट भी किया जाएगा.
दवा कंपनियों और अस्पतालों के लिए सख्त निर्देश
सरकार ने नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- वेबसाइट पर प्रकाशन: सभी दवा निर्माण कंपनियों को अपनी संशोधित मूल्य सूची अनिवार्य रूप से अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी.
- व्यापक प्रचार: कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नई कीमतों की जानकारी देश भर के खुदरा विक्रेताओं, वितरकों और अस्पतालों तक प्रभावी तरीके से पहुंचे.
- अनिवार्य प्रदर्शन: खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को 9 नवंबर से केवल संशोधित और घटी हुई दरों पर ही दवाएं बेचनी होंगी. साथ ही, उन्हें अपनी फार्मेसी में नई कीमतों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित (Display) करना होगा ताकि आम जनता पारदर्शिता देख सके.
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम देश में कैंसर के महंगे होते इलाज को काफी हद तक सुलभ और किफायती बनाएगा. विशेष तौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए, जिन्हें जीवनरक्षक दवाओं की ऊंची कीमतों के कारण कर्ज के जाल में फंसना पड़ता था, यह नियम एक बड़ा संबल साबित होगा.


