पटना. अगर किसी से पूछा जाए कि 12 वर्षों में बिना किसी जादुई चिराग के दिन-दुगनी और रात-चौगुनी तरक्की कैसे की जाती है, तो हमारे समाज को अब किसी मैनेजमेंट गुरु के पास जाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. इसके लिए दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) आनंद कुमार विभूति साहब की केस स्टडी ही काफी है.
वर्ष 2014 में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 53वीं से 55वीं बैच परीक्षा पास कर सीधे ‘ईमानदार लोक सेवक’ बने बीडीओ साहब ने महज़ 12 सालों की ‘अथक और निष्ठावान सेवा’ के बल पर 1.71 करोड़ रुपये से अधिक की ज्ञात अवैध संपत्ति का ऐसा साम्राज्य खड़ा कर दिया, जिसे देखकर कॉरपोरेट जगत के दिग्गज भी अपना सिर धुन लें.
आय से 121% ज्यादा ‘मेहनताना’
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीमों ने जब मंगलवार को पूर्वी चंपारण, दानापुर, दरभंगा और मुजफ्फरपुर में एक साथ छापेमारी की, तो साहब की असली ‘मेहनत’ का फल सामने आया. जांच अधिकारियों के मुताबिक, बीडीओ साहब ने अपनी वैध आय की तुलना में करीब 121.87% अधिक संपत्ति अर्जित की है. यानी जितना सरकार ने उन्हें वेतन के रूप में दिया, उससे कहीं ज्यादा का ‘इनाम’ उन्होंने अपने पद की गरिमा और फाइलों को आगे बढ़ाने के बदले खुद को ही दे डाला.
पैतृक गांव में 70 लाख का महल, शहर-शहर में 16 प्लॉट
बीडीओ साहब को शायद ज़मीन-जायदाद से गहरा लगाव है. मुजफ्फरपुर के अहियापुर स्थित उनके निजी आवास की तलाशी में ऐसे दस्तावेज मिले, जिनसे 16 अलग-अलग भूखंडों (प्लॉट) के मालिकाना हक का खुलासा हुआ. ये प्लॉट सिर्फ उनके अपने नाम पर नहीं, बल्कि अपने रिश्तेदारों और परिवार के 7 अन्य सदस्यों के नाम पर बड़े ही प्यार से बांटे गए थे.
इतना ही नहीं, पूर्वी चंपारण स्थित उनके पैतृक गांव में लगभग 70 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से एक आलीशान मकान/हवेली का निर्माण कराया जा रहा है. गांव के लोगों को शायद यही लगता होगा कि साहब शहर में दिन-रात ‘जनसेवा’ कर पसीना बहा रहे हैं, लेकिन पसीना किस चीज़ का बहाया जा रहा था, इसका अंदाजा अब सबको हो चुका है.
गाड़ियों का शो-रूम और 16 बैंक खाते
जब प्रॉपर्टी इतनी हो, तो सवारी भी तो शाही होनी चाहिए! छापेमारी के दौरान साहब के ठिकानों से पांच बड़ी गाड़ियां बरामद हुईं, जिनमें इनोवा, क्रेटा, स्कॉर्पियो जैसी चमचमाती चार-पहिया गाड़ियां और दो दोपहिया वाहन शामिल हैं. ऐसा लगता है मानो बीडीओ आवास न होकर किसी प्रयुक्त लग्जरी गाड़ियों का शो-रूम हो.
वित्तीय प्रबंधन के मामले में भी बीडीओ साहब किसी से कम नहीं निकले. उनके और उनके परिवार के नाम पर कुल 16 बैंक खाते मिले हैं. इसके अलावा, एक बैंक लॉकर की चाबी भी बरामद हुई है, जिसे खोलना अभी बाकी है—ईओयू को आशंका है कि उस लॉकर से कुबेर का खजाना और निकल सकता है.
बीमा और म्यूचुअल फंड में 70 लाख का निवेश
साहब को अपने और परिवार के भविष्य की चिंता भी बहुत थी. इसलिए उन्होंने जीवन बीमा निगम (LIC) और दूसरी बीमा कंपनियों में भारी-भरकम निवेश कर रखा था. दस्तावेजों के अनुसार, वे हर साल करीब 1.5 लाख रुपये का सालाना प्रीमियम भरते थे. इसके अलावा, म्यूचुअल फंड की अलग-अलग योजनाओं में करीब 70 लाख रुपये जमा होने से संबंधित कागजात भी जब्त किए गए हैं.
छापेमारी के ठिकाने:
- पूर्वी चंपारण में बीडीओ का पैतृक आवास.
- दानापुर के आशियाना स्थित साईं बिहार अपार्टमेंट.
- दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित बीडीओ का कार्यालय कक्ष व सरकारी आवास.
- मुजफ्फरपुर के अहियापुर नगर रोड स्थित निजी आवास.
सरकार भले ही विकास योजनाओं के नाम पर बजट जारी करती रहे, लेकिन धरातल पर विकास कैसे होता है और फाइलें कैसे ‘सोना’ उगलती हैं, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण बीडीओ साहब की यह 12 साल की बेमिसाल यात्रा है!



