पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व शिक्षाविद् डॉ. रासबिहारी सिंह का कहना है कि देश के नामचीन उच्च शिक्षण संस्थानों में जिस तरीके के अंतरराष्ट्रीय मानक पर शोध हो रहे हैं वैसे ही स्तर पर राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के स्तर से शोध कार्य की जरूरत लंबे अरसे से महसूस की जा रही है. सरकार के स्तर पर ऐसी पहल समय की जरूरत है.
पटना. बिहार के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान एवं नवाचार (रिसर्च एंड इनोवेशन) की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार एक महत्वाकांक्षी पहल करने जा रही है. बिहार सरकार जल्द ही ‘मुख्यमंत्री शोध नवाचार योजना’ को कैबिनेट से स्वीकृति दिलाने की तैयारी में है. इस योजना के तहत राज्य भर के यूनिवर्सिटी शिक्षकों को शोध कार्य के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी.
राजभवन और राज्य सरकार के बीच हुई उच्चस्तरीय सहमति के बाद तैयार की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्राध्यापकों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक व तकनीकी अनुसंधानों से जोड़ना है.
त्रिस्तरीय समिति करेगी परियोजनाओं का चयन
योजना को पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाए रखने के लिए शोध प्रस्तावों के चयन की प्रक्रिया त्रिस्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी के माध्यम से पूरी की जाएगी:
- प्रथम चरण: आवेदनों की प्राथमिक स्क्रूटनी की जाएगी.
- द्वितीय चरण: शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों की उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति आवेदनों का मूल्यांकन करेगी.
- तृतीय चरण: प्रोजेक्ट विषय पर बाहरी विशेषज्ञों (एक्सटर्नल एक्सपर्ट्स) की अनुशंसा ली जाएगी, जिसके आधार पर राज्य स्तरीय समिति अंतिम निर्णय लेगी.
किस्तों में मिलेगी अनुदान राशि, 55 वर्ष अधिकतम उम्र सीमा
शोध के इच्छुक शिक्षकों को ‘बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद’ (BSHEC) के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. योजना का लाभ उठाने के लिए प्राध्यापकों की अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष तय की गई है.
रिसर्च वर्क की प्रकृति के आधार पर प्रोजेक्ट की अवधि छह माह से लेकर दो वर्ष तक होगी. स्वीकृत 10 लाख रुपये की अधिकतम राशि हर महीने किस्तों में जारी की जाएगी. बजट का आवंटन निर्धारित मदों में किया जाएगा, जिसमें रिसर्च स्टाफ के लिए 40%, फील्ड वर्क हेतु 25%, स्टडी मैटेरियल के लिए 20%, रिसर्च पेपर प्रकाशन हेतु 5% और अन्य मदों के लिए 10% राशि तय की गई है.
17 विश्वविद्यालयों और 4 संस्थानों के शिक्षकों को मिलेगा लाभ
चालू वित्तीय वर्ष में इस मद के लिए 10 करोड़ रुपये का शुरुआती बजट प्रस्तावित किया गया है. योजना के दायरे में पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, जयप्रकाश विश्वविद्यालय और बीआरए बिहार विश्वविद्यालय समेत राज्य के सभी 17 पारंपरिक व तकनीकी विश्वविद्यालय शामिल हैं. इसके अलावा चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान जैसे 4 प्रतिष्ठित शोध संस्थानों के चयनित 80 से 100 प्राध्यापकों को प्रतिवर्ष इस अनुदान का लाभ दिया जाएगा.
सरकारी स्तर की यह पहल राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के माहौल को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित होगी.
इन विश्वविद्यालयों व शोध संस्थानों में होगा लागू
पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, चाणक्य नेशनल ला यूनिवर्सिटी, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, जय प्रकाश विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, बीएन मंडल विश्वविद्यालय, पटना के ललित नारायण इंस्टीच्यूट ऑफ मैनेजमेंट, एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान, डेवलपमेंट मैनेजमेंट इंस्टीच्यूट और चंद्रगुप्त इंस्टीच्यूट ऑफ मैनेजमेंट.


