छात्र आंदोलन के बीच सियासी सक्रियता से मुद्दा राजनीतिकरण की ओर बढ़ रहा है. इससे छात्रों की वास्तविक मांगों के प्रभावित होने की आशंका जतायी जाने लगी है.
रांची. झारखंड में छात्र आंदोलन उफान पर है. छात्र परीक्षा में धांधली को लेकर मुखर है और एक निष्पक्ष व्यवस्था की मांग करते हुए आंदोलन कर रहे तो दूसरी ओर सरकार और विपक्ष के बीच आंदोलन को लेकर ताना-तानी जारी है. सत्ता पक्ष के नेता विपक्ष पर छात्रों को भड़काने का आरोप लगा रहे तो विपक्ष ने छात्रों की आवाज दबाने का आरोप सरकार पर लगाया है.
इस बीच JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन और उन पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा बुलाए गए राज्यव्यापी ‘झारखंड बंद’ का मिलाजुला (आंशिक) असर देखने को मिला. राजधानी रांची सहित कई जिलों में जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और आगजनी की, वहीं ज्यादातर इलाकों में स्कूल, सरकारी दफ्तर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सामान्य दिनों की तरह खुले रहे.
सड़कों पर जमीनी हकीकत, बंद का आंशिक प्रभाव
मंगलवार को बंद के दौरान राजधानी रांची, हजारीबाग और अन्य प्रमुख शहरों में मिलाजुला असर दर्ज किया गया. रांची के हरमू रोड और प्रमुख चौराहों पर भाजपा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया और यातायात बाधित करने का प्रयास किया.
पुरानी विधानसभा परिसर के समीप ABVP कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई. प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया. हालांकि, निजी स्कूलों की बसें चलती नजर आईं, अधिकांश सरकारी व निजी कार्यालय खुले रहे और सार्वजनिक परिवहन पर बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा.
विपक्ष का प्रहार, ‘छात्रों की आवाज दबा रही राज्य सरकार’
बंद का नेतृत्व कर रहे विपक्षी दल भाजपा ने राज्य सरकार पर छात्रों की न्यायसंगत मांगों को लाठियों के दम पर दबाने का गंभीर आरोप लगाया है.
भाजपा का रुख: विपक्षी नेताओं का कहना है कि JPSC और JSSC परीक्षाओं में हुई धांधली ने राज्य के लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका दिया है. शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा घेराव करने जा रहे निहत्थे छात्रों और ABVP कार्यकर्ताओं पर पुलिसिया बर्बरता और लाठीचार्ज हेमंत सरकार की तानाशाही प्रवृत्ति को दर्शाता है. विपक्ष ने परीक्षाओं की पारदर्शी जांच CBI से कराने तथा सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग दोहराई.
सत्ता पक्ष का पलटवार, ‘विपक्ष परजीवी की तरह राजनीति कर रहा’
विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सत्तारूढ़ गठबंधन ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए करारा हमला बोला.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा : मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और छात्रों की अधिकांश जायज मांगों को स्वीकार कर लिया गया है. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “विपक्ष परजीवी की तरह व्यवहार कर रहा है, जिसके पास अपना कोई मुद्दा नहीं बचा है. वे युवाओं के कंधों पर बंदूक रखकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश कर रहे हैं. सरकार छात्रों से सीधे संवाद कर रही है और उन्हें न्याय दिलाकर रहेगी.”
सत्तारूढ़ दल का पक्ष: सत्ता पक्ष के मंत्रियों का कहना है कि सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है. भाजपा केवल राज्य के माहौल को खराब करने और विकास कार्यों में बाधा डालने का प्रयास कर रही है.
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है. एक तरफ जहां विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बताकर राज्यभर में सड़कों पर उतर रहा है, वहीं सरकार इसे विपक्ष का राजनीतिक हथकंडा करार दे रही है. इन सब के बीच राज्य के युवा और अभ्यर्थी परीक्षा में निष्पक्षता और पारदर्शी न्याय की राह देख रहे हैं.


