रांची. झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में घोटालों का पुराना इतिहास रहा है. टेंडर मैनूपुलेशन से लेकर योजना में विचलन को लेकर कई योजनाओं में गड़बड़ी की चल रही जांच के बीच जल जीवन मिशन की परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और बंदरबांट का मामला सामने आया है.
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य ठेकेदारों को करोड़ों रुपये के काम सौंप दिए गए. इस पूरे खेल में जमशेदपुर प्रमंडल की निविदा प्रक्रिया में सीएजी ने विभाग और ठेकेदारों के बीच गहरी मिलीभगत की गंभीर आशंका व्यक्त की है.
जमशेदपुर प्रमंडल में निविदा आवंटन और मिलीभगत का खेल
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों में निविदाओं के आवंटन में पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव रहा. सबसे चौंकाने वाला मामला जमशेदपुर और गढ़वा प्रमंडल का सामने आया है:
सिंगल से ज्वाइंट वेंचर का खेल: दो अलग-अलग प्रमंडलों में पांच अलग-अलग निविदाओं में केवल दो ही ठेकेदारों ने भाग लिया था. नियमों के अनुसार एक प्रमंडल में तीन काम एक ठेकेदार को और दो काम दूसरे को दिए गए थे. लेकिन जब बात जमशेदपुर प्रमंडल की आई, तो इन्हीं दोनों अयोग्य संवेदकों (ठेकेदारों) ने आपस में हाथ मिला लिया और उन्हें ‘ज्वाइंट वेंचर’ बनाकर निविदाएं आवंटित कर दी गईं.
सिंडिकेट और मिलीभगत की आशंका: सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि जमशेदपुर प्रमंडल में जिस तरह से प्रतिस्पर्धी बोली लगाने के बजाय ठेकेदारों ने आपस में साठगांठ की, वह निष्पक्ष टेंडर प्रक्रिया का उल्लंघन है. रिपोर्ट में डिमांड ड्राफ्ट (DD) की खरीद और बोली प्रक्रिया में भी मिलीभगत कर काम हासिल करने की ओर इशारा किया गया है.
अयोग्य ठेकेदारों को बांटे गए करोड़ों के काम
ऑडिट रिपोर्ट के लिए सैंपल के तौर पर ली गई 39 निविदाओं में से 7 निविदाएं एक ही एजेंसी को दी गईं. 54.05 करोड़ रुपये मूल्य की इस निविदा में शर्त थी कि एजेंसी को पिछले 5 वित्तीय वर्षों का ऑडिटेड खाता जमा करना होगा, जिसके आधार पर टर्नओवर तय होता. हालांकि, ठेकेदार ने केवल 2 साल का लेखा-जोखा दिया और 3 साल के दस्तावेज गायब होने के बावजूद अफसरों ने उसे काम दे दिया.
इसके अलावा, टेंडर हासिल करने के लिए आवश्यक संसाधन जैसे ड्रील मशीन, तकनीकी कर्मचारी और इंजीनियरों की सूची को भी सभी 7 कामों के लिए एक जैसा ही (रिपीट) दिखा दिया गया, जिसकी विभाग ने कोई जांच नहीं की.
100% तक कर दिया गया एडवांस भुगतान
नियमों के विपरीत जाकर कई मामलों में संवेदकों को काम पूरा होने या निर्धारित सीमा से अधिक भुगतान किया गया. जहां 85 प्रतिशत तक का ही भुगतान किया जाना चाहिए था, वहां विभागीय अधिकारियों ने ठेकेदारों पर दरियादिली दिखाते हुए 100 प्रतिशत तक का भुगतान जारी कर दिया.
सीएजी की इस रिपोर्ट ने जल जीवन मिशन के निष्पादन और सरकारी राशि के उपयोग पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. जमशेदपुर सहित अन्य प्रमंडलों में जिस प्रकार मिलीभगत कर अयोग्य एजेंसियों को लाभ पहुंचाया गया, उसने विभाग की पूरी कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है.


