नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम. संसद में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के अवसर पर पारित प्रस्ताव और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के बाद देश में एक नया राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है. ‘गोली मार दो, पर इस जन्म में पूरा वंदे मातरम नहीं गाएंगे’: संसद और केंद्र के फैसले के खिलाफ केरल से उठी खुली चुनौती, जानिए इसके राजनीतिक मायने
संसद में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर पारित प्रस्ताव और केंद्र सरकार के नए निर्देशों के बाद देश की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है. केंद्र सरकार की पहल और निर्देशों के जवाब में केरल के कासरगोड से कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने एक बेहद आक्रामक और सीधा बयान देकर राजनीतिक पारे को चढ़ा दिया है.
“चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमें गोली मारने की ही धमकी क्यों न दे दें, इस जन्म में तो केरल में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण नहीं गाया जाएगा.”
केंद्रीय निर्देशों को सिरे से खारिज करते हुए सांसद उन्नीथन ने कहा, “चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमें गोली मारने की ही धमकी क्यों न दे दें, इस जन्म में तो केरल में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण नहीं गाया जाएगा.”
विवाद की पृष्ठभूमि और मुख्य सचिव का पत्र
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब केरल के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा ने स्वतंत्रता दिवस और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान 2026 के अवसर पर सभी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाने का पत्र जारी किया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली समिति ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह निर्देश तैयार किया था.
हालांकि, केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन और वामपंथी दलों (सीपीएम) ने इसका कड़ा विरोध करते हुए इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडे को थोपने का प्रयास करार दिया.
केरल के राजनीतिक समीकरण और कांग्रेस का रुख
कांग्रेस सांसद के इस बयान के गहरे राजनीतिक निहितार्थ हैं:
- गठबंधन और वोट बैंक की मजबूरी: केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) एक प्रमुख साझेदार है. ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों को अनिवार्य रूप से गाए जाने पर कुछ मुस्लिम संगठनों की आपत्तियां रही हैं. ऐसे में कांग्रेस सांसद का यह बयान अपने स्थानीय सहयोगियों और वोट बैंक को एकजुट रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.
- केंद्र बनाम राज्य एवं राज्यपाल से टकराव: उन्नीथन ने केवल वंदे मातरम पर ही नहीं, बल्कि राजभवन की भूमिका पर भी सीधा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल अब केंद्र सरकार के राजनीतिक हथियार बनकर रह गए हैं और धनबल के जरिए लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं.
राष्ट्रीय राजनीति पर असर और भाजपा का पलटवार
केरल से आई इस सीधी चुनौती के बाद राष्ट्रीय स्तर पर वैचारिक लड़ाई और तेज होने के आसार हैं:
- तुष्टिकरण बनाम राष्ट्रवाद का मुद्दा: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस बयान को राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान और तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़कर कांग्रेस पर हमलावर है. इससे पहले भी विधानसभा सत्र में पूर्ण वंदे मातरम न गाए जाने पर भाजपा ने कांग्रेस और वामदलों को घेरा था.
- विपक्ष की गोलबंदी: केरल में भले ही कांग्रेस और सीपीएम आमने-सामने हों, लेकिन केंद्र के इस निर्देश के खिलाफ दोनों दल एक सुर में बोल रहे हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के अनिवार्य कार्यान्वयन के मुद्दे पर क्षेत्रीय दल केंद्र के खिलाफ एकजुट मोर्चा बना रहे हैं.


