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Home » ‘धृतराष्ट्र जैसा मौन रहा तो तबाह हो जाएगी न्याय व्यवस्था’, दागी वकीलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की ऐतिहासिक ‘टिप्पणी’, जारी किया ‘100 किमी रूल’
ओसियन स्पेशल

‘धृतराष्ट्र जैसा मौन रहा तो तबाह हो जाएगी न्याय व्यवस्था’, दागी वकीलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की ऐतिहासिक ‘टिप्पणी’, जारी किया ‘100 किमी रूल’

Ocean News DeskBy Ocean News DeskJuly 20, 2026
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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश की निचली अदालतों में पैरवी की आड़ में पैर पसार रहे आपराधिक तत्वों और ‘माफिया संस्कृति’ पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक डिजिटल ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है. अदालत ने राज्य में वकीलों के आपराधिक रिकॉर्ड और फर्जी डिग्रियों पर बेहद सख्त रुख अख्तियार करते हुए एक क्रांतिकारी आदेश पारित किया है. उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि न्याय के पहरेदार ही अपराध की शरण में चले जाएंगे, तो आम नागरिक का कानून पर से भरोसा उठ जाएगा.

“कानून दो बार मरता है…” कोर्ट की मार्मिक टिप्पणी

न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई करते हुए एक बेहद मार्मिक और तीखी टिप्पणी की. न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने अपने आदेश में लिखा:

“कानून दो बार मरता है, पहली बार तब जब उसके अधिकारी (वकील) अपराधी बन जाएं, और दूसरी बार तब जब जज न्यायिक साहस दिखाने के बजाय चुप्पी साध लें. दोनों ही स्थितियों में, कानून का शासन सबसे पहला शिकार होता है.”

महाभारत का ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए न्यायमूर्ति ने कहा कि जिस प्रकार कुरुक्षेत्र की सभा में धृतराष्ट्र के मौन रहने से महाविनाशकारी युद्ध की नींव पड़ी, ठीक उसी प्रकार यदि आज न्यायपालिका और व्यवस्था ने इस गंभीर संकट पर चुप्पी साधे रखी, तो पूरी न्याय व्यवस्था मटियामेट हो जाएगी. कोर्ट ने चिंता जताई कि जिला अदालतों के न्यायाधीश अक्सर सामाजिक और राजनीतिक दबाव समूहों के डर से इन बाहुबली वकीलों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाने से कतराते हैं, जिससे नए और ईमानदार न्यायिक अधिकारियों व युवा वकीलों के लिए काम करना दूभर हो गया है.

यूपी में वकीलों का आपराधिक नेक्सस, चौंकाने वाले आंकड़े

मोहम्मद कफील बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Matter Under Article 227 No. 12231 of 2025) मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस महानिदेशक (DGP), बार काउंसिल और अन्य विभागों द्वारा जो डेटा पेश किया गया, उसने कोर्ट को झकझोर कर रख दिया.

अपराध का ग्राफ: उत्तर प्रदेश में कुल 4,157 अधिवक्ता ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जिन पर 5,056 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं.

FIR की झड़ी: मथुरा और गोंडा जैसे जिलों में हालात इतने बदतर हैं कि कुछ वकीलों पर 32 से लेकर 46 तक FIR दर्ज हैं, इसके बावजूद वे धड़ल्ले से अदालतों में वकालत कर रहे हैं.

फर्जी डिग्री का खेल: जांच के दौरान 105 वकीलों की LL.B. और ग्रेजुएशन की डिग्रियां पूरी तरह फर्जी पाई गई हैं.

बार पर कब्जा: गोरखपुर और कानपुर समेत कई जिला बार एसोसिएशनों में ऐसे लोग पदाधिकारी बने बैठे हैं, जिनका पुराना आपराधिक इतिहास रहा है. कोर्ट ने कहा कि कई वकीलों ने अदालतों को जबरन कब्जा हटाने और अवैध तरीके से डिक्री लागू कराने का जरिया बना लिया है.

हाईकोर्ट का क्रांतिकारी आदेश, क्या है ‘100 किलोमीटर रूल’?

इस अराजकता को जड़ से खत्म करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बेहद कड़ा और अभूतपूर्व आदेश जारी किया है:

दूरी का नियम (The 100 km Rule): ऐसे बाहुबली या दागी वकील जिन पर 7 साल या उससे अधिक की सजा वाले जघन्य अपराध दर्ज हैं, उनके मुकदमों की सुनवाई अब उनके गृह जिले में नहीं होगी. स्थानीय अदालतों और गवाहों पर उनके प्रभाव को खत्म करने के लिए उनके केस गृह जिले से कम से कम 100 किलोमीटर दूर किसी दूसरे जिले में ट्रांसफर किए जाएंगे.

बार काउंसिल को फटकार: कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जहां हजारों वकीलों पर मुकदमे हैं, वहां काउंसिल की अनुशासनात्मक कार्रवाई महज कुछ लोगों तक सीमित है. कोर्ट ने सभी बार एसोसिएशनों को अपनी संस्थाओं से अपराधियों को बाहर

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