- एमजीएम अस्पताल के हालात शर्मनाक, ‘नो बेड’ की बोर्ड, गैलरी बनी वार्ड
जमशेदपुर. लगातार हो रही मौसमी बीमारियों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण जमशेदपुर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल (MGM) इस समय पूरी तरह से चरमरा गया है. कोल्हान क्षेत्र के मरीजों की उम्मीद कहा जाने वाला यह अस्पताल खुद ‘बीमार’ नजर आ रहा है.
अस्पताल के इमरजेंसी से लेकर मेडिसिन वार्ड तक पैर रखने की जगह नहीं है. बेड पूरी तरह भर चुके हैं, जिसके कारण अस्पताल प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए हैं. स्थिति यह है कि गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को वार्डों के बाहर गैलियारे (कॉरिडोर), बरामदों और फर्श पर स्ट्रेचर तथा बेंच पर लिटाकर इलाज दिया जा रहा है.
अस्पताल की लाचारी के दो जीवंत उदाहरण
तीन दिन से बेंच पर इलाज: तेज बुखार से पीड़ित एक मरीज मंगलवार दोपहर से ही इमरजेंसी के बाहर लगे बेंच पर लेटा हुआ है. उसकी पत्नी सिर्फ इस उम्मीद में बेंच के नीचे बैठकर दिन काट रही है कि कब कोई बेड खाली हो और उसके पति को सही इलाज मिले.
बेड नहीं मिला, बेंच पर ही चढ़ा दी ड्रिप: चाकुलिया की बिंदु देवी को तेज बुखार के कारण गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया. बेड उपलब्ध न होने की वजह से डॉक्टरों ने उन्हें बेंच पर ही लिटाकर सलाइन (ड्रिप) चढ़ा दी. डॉक्टरों का साफ कहना है कि जब तक बेड खाली नहीं होगा, तब तक भर्ती करना मुमकिन नहीं है.
ब्रेन मलेरिया और वायरल का तांडव, डराने वाले आंकड़े
जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में ब्रेन मलेरिया, साधारण मलेरिया और वायरल फीवर का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. गुरुवार को ही जिले में कुल 90 जांच शिविरों में 10,357 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें से 89 नए मलेरिया मरीज पाए गए हैं.
इनमें से 66 मरीज साधारण मलेरिया (प्लसमोडियम वाइवेक्स) के हैं, जबकि 22 मरीज खतरनाक ‘ब्रेन मलेरिया’ (पी. फाल्सीपेरम) से ग्रसित हैं. इस मामले में सिविल सर्जन डॉ साहिर पाल लगातार बैठक का दिशा-निर्देश दे रहे हैं.
एक मरीज मिक्स्ड इंफेक्शन से पीड़ित पाया गया है.
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले पोटका प्रखंड इस समय सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना हुआ है, जहां अकेले 30 से अधिक संक्रमित मिले हैं. इसके अलावा मुसाबनी और डुमरिया में भी महामारी जैसे हालात हैं.
प्रशासनिक दावों की खुली पोल, वैकल्पिक व्यवस्था केवल कागजों पर
एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा का कहना है कि मौसमी बीमारियों के कारण ओपीडी और इमरजेंसी में सामान्य दिनों के मुकाबले भारी भीड़ उमड़ रही है. हालांकि, प्रशासन के ‘बेड मैनेजमेंट’ और ‘अतिरिक्त बेड’ के दावे धरातल पर पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं.
जिला स्वास्थ्य विभाग अब सदर अस्पताल के फैब्रिकेटेड अस्पताल को बैकअप के तौर पर तैयार रखने की बात कह रहा है, लेकिन जब तक यह व्यवस्था धरातल पर उतरेगी, तब तक हालात बेकाबू हो चुके होंगे. विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले दिनों में डेंगू के मामलों में भी उछाल आ सकता है, जिसके बाद स्थिति और भयावह हो जाएगी.
मलेरिया और ब्रेन मलेरिया का रूप आपातकाल से कम नहीं
जमशेदपुर में मलेरिया और ब्रेन मलेरिया का यह रूप किसी स्वास्थ्य आपातकाल से कम नहीं है. फर्श और गैलरी में तड़पते मरीज इस बात का प्रमाण हैं कि सरकारी सिस्टम आम जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं देने में पूरी तरह विफल रहा है. अगर समय रहते अतिरिक्त बेड, डॉक्टरों की तैनाती और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी.
राज्य में मलेरिया की स्थिति, जमशेदपुर बना हॉट स्पॉट
| जिला | अब तक मिले मलेरिया के मामले |
| पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) | 7,527 |
| पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) | 6,772 |
| गोड्डा | 1,804 |
| खूंटी | 1,413 |
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