रांची/गुरुग्राम: अपराधियों के हौसले पस्त करने और कानून का इकबाल बुलंद करने के लिए पुलिस को किस हद तक मुस्तैद होना पड़ता है, इसका ताजा उदाहरण हरियाणा के गुरुग्राम में देखने को मिला. गुरुवार रात गुरुग्राम पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रंगदारी न मिलने पर एक कारोबारी की हत्या करने पहुंचे उत्तर प्रदेश और हरियाणा के चार खूंखार शूटरों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया.
इस सनसनीखेज एनकाउंटर के बाद अब झारखंड के प्रबुद्ध नागरिकों और कानून-व्यवस्था के जानकारों के बीच यह बड़ा सवाल तैरने लगा है कि—क्या झारखंड पुलिस इस ताबड़तोड़ और सटीक कार्रवाई से कोई सबक लेगी?
खौफ फैलाने आए थे शूटर, पुलिस ने घेरा
गुरुग्राम के सुशांत लोक फेज-1 इलाके में विदेश में बैठे गैंगस्टर दीपक नांदल के इशारे पर पांच हथियारबंद शूटर प्रापर्टी कारोबारी विशाल बेरी की हत्या करने पहुंचे थे. रंगदारी न मिलने पर बदमाशों ने घर पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. लेकिन, वहां की क्राइम ब्रांच की टीमें पहले से अलर्ट थीं. पुलिस ने महज कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके को घेर लिया.
जब बदमाशों को आत्मसमर्पण करने को कहा गया, तो उन्होंने पुलिस पर ही गोलियां चला दीं. दोनों ओर से 50 से ज्यादा राउंड फायरिंग हुई. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने चार शूटरों—दीपा उर्फ संदीप (टोहाना), आर्यन, नितिन और अंकित (रोहतक)—को मार गिराया. मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं.
वीडियो बनाकर दहशत फैलाने की थी साजिश
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये शूटर केवल डराने नहीं, बल्कि कारोबारी की हत्या करने आए थे. वारदात के वक्त एक शूटर मोबाइल से वीडियो भी बना रहा था, ताकि इसे विदेश में बैठे गैंगस्टर को भेजकर रंगदारी के बाजार में दहशत का संदेश दिया जा सके. पुलिस ने मौके से 5 अत्याधुनिक पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं. मारे गए अपराधी दीपा पर आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास जैसे 14 गंभीर मामले दर्ज थे.
झारखंड के संदर्भ में क्यों जरूरी है यह सबक
झारखंड में पिछले कुछ समय से कोयला अंचल (धनबाद, रामगढ़) से लेकर राजधानी रांची और जमशेदपुर तक रंगदारी (Extortion) और लेवी के लिए कारोबारियों पर फायरिंग की घटनाएं आम हो चुकी हैं. अमन सिंह गैंग, सुजीत सिन्हा गैंग और अमन साव गैंग जैसे आपराधिक गिरोह जेल के भीतर से या राज्य के बाहर से व्यापारियों को डरा-धमका रहे हैं.
गुरुग्राम की घटना से झारखंड पुलिस के लिए तीन बड़े सबक
टेलिजेंस और क्विक रिस्पॉन्स: गुरुग्राम पुलिस को पहले से इनपुट था और उनकी क्राइम ब्रांच की टीमें मौके पर चंद मिनटों में पहुंच गईं. झारखंड पुलिस को भी अपनी टेक्निकल सेल और सूचना तंत्र को इतना मजबूत करना होगा कि वारदात होने से पहले ही घेराबंदी की जा सके.
अपराधियों में एनकाउंटर का डर: जब तक कानून तोड़ने वालों के मन में यह खौफ नहीं होगा कि पुलिस की गोली का जवाब गोली से मिलेगा, तब तक रंगदारी का यह सिंडिकेट नहीं टूटेगा.
गैंगस्टर नेटवर्क पर सीधा प्रहार: विदेश या अन्य राज्यों से चल रहे गैंग्स की कड़ियों को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए एसटीएफ और स्थानीय पुलिस को आक्रामक रवैया अपनाना होगा.
गुरुग्राम में यूपी और हरियाणा के शूटरों का जो हश्र हुआ, वह अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है. अब देखना यह है कि रंगदारी और गैंगस्टरों की चुनौती से जूझ रही झारखंड पुलिस इस “सटीक और सख्त” पुलिसिंग से क्या सबक लेती है और राज्य के व्यापारियों को भयमुक्त माहौल देने के लिए क्या कदम उठाती है.
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