- बिहार में सेटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन बेचने में रैयतों की बढ़ी रुचि
पटना. बिहार में विकास की बयार अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण भू-स्वामियों (रैयतों) की किस्मत बदलने का जरिया बन रही है. राज्य में प्रस्तावित 12 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप की महायोजना ने ‘वृहद बिहार’ के सपने को धरातल पर उतार दिया है.
सबसे खास बात यह है कि इस महायोजना में किसानों और ग्रामीणों के हितों को सर्वोपरि रखा गया है, जिसके कारण अपनी जमीन देने के लिए रैयतों में भारी उत्साह देखा जा रहा है. आवास बोर्ड को अब तक 367 से अधिक आवेदन मिल चुके हैं, जो इस योजना की सफलता की गवाही दे रहे हैं.
जमीन का अभूतपूर्व मूल्य: ग्रामीणों के लिए फायदे का सौदा
बिहार सरकार की नई नीति ने भूमि अधिग्रहण के पुराने और जटिल नियमों को पीछे छोड़ते हुए ग्रामीणों के लिए मुनाफे के नए द्वार खोल दिए हैं:
चार गुना बंपर मुआवजा: ग्रामीण क्षेत्रों की जमीन के लिए सरकार बाजार मूल्य या न्यूनतम सरकारी दर (MVR) का 4 गुना मुआवजा दे रही है. इसके अलावा, ग्रामीणों को 10% अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है.
शहरी जमीन पर भी डबल फायदा: शहरी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली जमीनों के लिए बाजार मूल्य का दोगुना (2 गुना) भुगतान तय किया गया है.
टैक्स और फीस से पूरी आजादी: इस पूरी प्रक्रिया में खरीदी जाने वाली भूमि पर भू-स्वामियों को कोई स्टांप शुल्क (Stamp Duty) या पंजीकरण शुल्क (Registration Fee) नहीं देना होगा. यह पूरा खर्च सरकार खुद वहन कर रही है.
7 दिनों में सीधा बैंक खाते में भुगतान: नई पारदर्शी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत, सक्षम प्राधिकार की मंजूरी मिलते ही बिहार राज्य आवास बोर्ड मात्र 7 दिनों के भीतर सीधे रैयत के बैंक खाते में पूरी राशि ट्रांसफर कर रहा है.
‘वृहद बिहार’ का निर्माण और क्षेत्रीय विकास
इस योजना का असली उद्देश्य पटना सहित बिहार के बड़े शहरों पर आबादी का बोझ कम करना और ग्रामीण इलाकों को आधुनिक महानगरों में बदलना है.
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड टाउनशिप का महाजाल: अकेले पटना जिले के 9 प्रखंडों (जैसे पुनपुन, फतुहा, नौबतपुर, धनरुआ) के 274 राजस्व गांवों को इसमें शामिल किया गया है. इसका सीधा मतलब है कि कल तक जो सुदूर गांव थे, वे कल के आधुनिक बिजनेस और रेजिडेंशियल हब बनने जा रहे हैं.
स्थानीय स्तर पर रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर: इन सेटेलाइट टाउनशिप के बनने से गांवों में चौड़ी सड़कें, आधुनिक ड्रेनेज, स्कूल, अस्पताल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स आएंगे. इससे ग्रामीण युवाओं को अपने घर के पास ही रोजगार मिलेगा और उन्हें पलायन नहीं करना पड़ेगा.
यह परियोजना केवल जमीन की खरीद-बिक्री नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर ‘वृहद बिहार’ को देश के सबसे आधुनिक राज्यों की कतार में खड़ा करने का ऐतिहासिक ब्लूप्रिंट है.
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