- जब रक्षक ही भक्षक बन गया, एक बदले की आग में उजड़ गए दो हंसते-खेलते परिवार
- जमानत पर छूटे युवक ने अपने परिवार के तीन लोगों के साथ शिकायत करने वाली युवती समेत तीन को मौत की नींद सुलाया
हैदराबाद. रिश्तों की पवित्रता और न्याय की उम्मीदों पर से भरोसा उठा देने वाली एक रूह कंपा देने वाली घटना तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले से सामने आई है. जहाँ एक शख्स के सिर पर सवार सनक और बदले की अंधी आग ने न केवल उसके अपने हंसते-खेलते संसार को राख कर दिया, बल्कि एक मासूम शिकायतकर्ता के पूरे परिवार को भी हमेशा के लिए खामोश सुला दिया.
प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) मामले के एक आरोपी ने जमानत पर बाहर आते ही वह कत्लेआम मचाया, जिसने पूरी इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है.
अपने ही आंगन में बिखरा खून
कहते हैं कि घर वो महफूज़ जगह होती है जहाँ इंसान दुनिया भर के थपेड़ों से थककर सुकून की सांस लेता है. लेकिन 35 वर्षीय राजकुमार की पत्नी पार्वती सरिता (30 वर्ष) और उसके दो मासूम बच्चों जिनकी उम्र महज़ चार साल और 18 महीने थी, को क्या पता था कि जिस चौखट को वे अपना आशियाना समझते थे, वही उनकी कब्रगाह बन जाएगी.
शुक्रवार की आधी रात, जब पूरी दुनिया गहरी नींद में सो रही थी, तब राजकुमार ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं. उसने अपनी ही पत्नी और उन दो अबोध बच्चों पर बेरहमी से चाकू से हमला कर दिया, जिन्हें उसने खुद उंगली पकड़कर चलना सिखाया होगा. जिस मासूम को अभी दुनिया की समझ भी नहीं थी, वह अपने ही पिता की नफ़रत की भेंट चढ़ गया. कत्ल करने के बाद उनके गलों को बेरहमी से रेत दिया गया, मानो वो कोई इंसान नहीं, बल्कि कोई बेजान वस्तु हों.
न्याय मांगने की इतनी भयानक सज़ा!
अपने ही परिवार को ख़त्म करने के बाद भी उस दरिंदे का खून शांत नहीं हुआ था. उसके भीतर बदले की कोई भयानक ज्वाला धधक रही थी. वह वहाँ से करीब छह किलोमीटर दूर देवलगुडा गांव की तरफ बढ़ा.
उस गांव में एक 17 साल की नाबालिग लड़की का परिवार रहता था, जिसने मई के महीने में राजकुमार के खिलाफ खुद को प्रताड़ित करने और पीछा करने की हिम्मत दिखाई थी. उस बच्ची ने कानून पर भरोसा किया था, उसने न्याय की गुहार लगाई थी.
लेकिन कानून की ढील और महज़ ₹20,000 के पर्सनल बॉन्ड पर छूटे इस भेड़िए ने उस बच्ची को न्याय मांगने की ऐसी खौफनाक सज़ा दी जो कोई सोच भी नहीं सकता. राजकुमार ने उस नाबालिग लड़की, उसकी मां और उसकी बूढ़ी दादी की भी उसी बेरहमी से गला काटकर हत्या कर दी. तीन पीढ़ियों की औरतें, जो शायद उस रात भी इस डर में जी रही होंगी कि आरोपी बाहर घूम रहा है, हमेशा के लिए मौत की आगोश में सो गईं.
पीछे छूट गए अनसुलझे सवाल
इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने अपने पिता को फोन कर अपना गुनाह कबूला और फरार हो गया. पुलिस अब उसकी तलाश में खाक छान रही है, लेकिन जो जिंदगियां चली गईं, वे कभी लौटकर नहीं आएंगी.
यह घटना केवल छह हत्याओं का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह हमारी सामाजिक और कानूनी व्यवस्था पर एक गहरा ज़ख्म है. यह चीख-चीख कर सवाल पूछ रही है कि जब ऐसे गंभीर मामलों के आरोपी इतनी आसानी से समाज में वापस आ जाते हैं, तो पीड़ित और उनके परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? आज दो घरों के आंगन सूने पड़े हैं, और पीछे छोड़ गए हैं केवल खून के धब्बे और कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा.
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