अयोध्या. रामनगरी अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद ट्रस्ट के संचालन की पूरी कमान कृष्ण मोहन के हाथों में सौंप दी गई है. उन्हें ट्रस्ट का नया अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है.
चोरी के विवाद के बाद जब ट्रस्ट को एक बेदाग, अनुभवी और कुशल प्रशासक की जरूरत थी, तब कृष्ण मोहन के नाम पर मुहर लगी. आइए जानते हैं कि आखिर कृष्ण मोहन कौन हैं और क्यों उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी के लिए चुना गया.
- आरएसएस से गहरा नाता: कृष्ण मोहन वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संघ चालक हैं. संघ परिवार में उन्हें उनकी सादगी, निष्ठा और सांगठनिक कुशलता के लिए जाना जाता है.
- प्रशासनिक अनुभव (पूर्व IFS अधिकारी): वह केवल एक संगठनकर्ता ही नहीं, बल्कि भारतीय वन सेवा (IFS) के महाराष्ट्र कैडर के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी भी हैं. साल 2012 में वन विभाग से रिटायर होने से पहले उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं.
- वैज्ञानिक पृष्ठभूमि: बहुत कम लोग जानते हैं कि लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी (M.Sc.) करने के बाद कृष्ण मोहन ने परमाणु ऊर्जा विभाग में एक वैज्ञानिक के रूप में भी देश की सेवा की थी.
- संघ में क्रमिक विकास: नागपुर में अपनी सेवा के दौरान वह आरएसएस से जुड़े. इसके बाद उन्होंने कदम-दर-कदम संगठन में अपनी पहचान बनाई. साल 2014 में वह नगर संघ चालक बने, 2017 में जिला संघ चालक, 2020 में प्रांत संघ चालक और अंततः 2023 में उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र संघ चालक बनाया गया.
- ट्रस्ट में कैसे हुई थी एंट्री: ट्रस्ट के सम्मानित सदस्य कामेश्वर चौपाल के दुखद निधन के बाद, कृष्ण मोहन को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बतौर ट्रस्टी शामिल किया गया था.
कृष्ण मोहन बने राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव, चंपत राय-अनिल मिश्रा-गोपाल राव ट्रस्ट से बाहर
सख्त फैसलों के पक्षधर, ‘एसआईटी जांच तक संभालेंगे मोर्चा’
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों और दैनिक जागरण की इस रिपोर्ट के मुताबिक, कृष्ण मोहन तब तक अंतरिम महासचिव के रूप में कामकाज संभालेंगे, जब तक कि विशेष जांच दल (SIT) अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंप देती. उन्हें करीब से जानने वालों का कहना है कि वे बेहद सरल स्वभाव के हैं, लेकिन जब बात अनुशासन और ईमानदारी की आती है, तो वह उतने ही सख्त हैं. वे राम मंदिर के चढ़ावे में सेंध लगाने वाले दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई के प्रबल पक्षधर हैं.
नए CEO की तलाश, बनाई गई 3 सदस्यीय ‘सुपर कमेटी’
ट्रस्ट ने केवल अंतरिम महासचिव की नियुक्ति ही नहीं की, बल्कि भविष्य के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए एक दूरगामी कदम भी उठाया है. मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज को पूरी पारदर्शिता से चलाने के लिए एक योग्य मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का चयन किया जाएगा.
इसके लिए ट्रस्ट ने एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो देश के योग्य नामों की स्क्रूटनी कर ट्रस्ट को अपनी सिफारिशें भेजेगी. इस समिति में शामिल हैं:
- न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली
- लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी
- सुरेश हावड़े
क्या है पूरा मामला?
याद दिला दें कि 5 जून को पहली बार राम मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी होने का सनसनीखेज मामला सामने आया था. इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 जून को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया. पुलिस और एसआईटी की संयुक्त कार्रवाई में अब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और छापेमारी का दौर लगातार जारी है.
इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और सुदृढ़ता आएगी.
- रामजन्मभूमि की कमान संभालने वाले ‘कृष्ण मोहन’ कौन है, जाने क्या है उनका आरएसएस से नाता - July 6, 2026
- राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा प्रहार : पहलगाम हमले में हाफिज़ सईद का नाम आना भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की होगी अग्निपरीक्षा - July 6, 2026
- कृष्ण मोहन बने राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव, चंपत राय-अनिल मिश्रा-गोपाल राव ट्रस्ट से बाहर - July 6, 2026





