RAIPUR. छत्तीसगढ़ में शराब की ओवररेटिंग की शिकायतों पर आबकारी आयुक्त पीएस एल्मा ने 4 आबकारी उपनिरीक्षकों को निलंबित कर दिया है. वहीं 8 अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. आबकारी विभाग के अनुसार, रायपुर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बलौदाबाजार-भाटापारा और धमतरी जिलों की मदिरा दुकानों में ओवररेटिंग के मामले पकड़े गए. विभागीय जांच में संबंधित अधिकारियों के क्षेत्राधिकार में गंभीर अनियमितता पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है.
विदेशी मदिरा दुकान फाफाडीह (रायपुर) में औचक निरीक्षण के दौरान विक्रेता अश्वन कुमार मेरिया द्वारा ऑल सीजन गोल्डन कलेक्शन रिजर्व व्हिस्की के दो पाव निर्धारित 480 रुपये के बजाय 500 रुपये में बेचे जाने का मामला सामने आया. इस मामले में विक्रेता के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 39(ग) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया. मामला आबकारी उपनिरीक्षक कौशल किशोर सोनी के प्रभार क्षेत्र का होने के कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की कम्पोजिट मदिरा दुकान गंडई में विक्रेता वेदप्रकाश निर्मलकर द्वारा तीन पाव देशी शराब निर्धारित 240 रुपये के बजाय 250 रुपये में बेचे जाने का मामला सामने आया. इसके बाद विक्रेता के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया. इस मामले में वृत्त प्रभारी आबकारी उपनिरीक्षक प्रभाकर सिरमौर को निलंबित किया गया है. वहीं सहायक जिला आबकारी अधिकारी चन्द्रप्रताप सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की कम्पोजिट मदिरा दुकान हिरमी में विक्रेता द्वारा निर्धारित मूल्य से 30 रुपये अधिक वसूले जाने का मामला सामने आया. इस प्रकरण में प्रभारी आबकारी उपनिरीक्षक मनराखन नेताम को निलंबित किया गया है. इसी प्रकार धमतरी जिले की कम्पोजिट मदिरा दुकान कुरूद में दो अलग-अलग मामलों में देशी शराब की बिक्री निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर किए जाने की पुष्टि हुई. इस मामले में आबकारी उपनिरीक्षक पुरुषोत्तम सिन्हा को निलंबित किया गया है.
इन आठ अधिकारियों को नोटिस
आबकारी विभाग ने जिन 8 जिला आबकारी और सहायक जिला आबकारी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, उनमें निरुपमा लोन्हारे, मुकेश अग्रवाल, जलेश सिंह, अजय सिंह धुर्वे, राजेश कुमार शर्मा, जेबा खान, चंद्रप्रताप सिंह और अल्ताफ खान शामिल हैं.
आबकारी आयुक्त ने मीडिया को बताया कि संबंधित अधिकारियों के प्रभार क्षेत्रों में इस प्रकार की गंभीर अनियमितताओं का पाया जाना उनके कर्तव्यों के प्रति लापरवाही, उदासीनता और शिथिल नियंत्रण को दर्शाता है. इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन मानते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई है.
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