दानापुर: “अंधेर नगरी” का तात्पर्य है, अन्याय की जगह, जहां अव्यवस्था और अराजकता हो,यह उस व्यवस्था का दर्शाता है जहां शासक भ्रष्ट और लापरवाह हो और कानून व्यवस्था का कोई ठिकाना नहीं हो। इसी से “अंधेर नगरी चौपट राजा”बनी है, जिसका तात्पर्य है कि एक भ्रष्ट और लापरवाह शासक के राज में अन्याय और अराजकता फैल जाती है। ऐसे में अगर राजा आत्ममुग्ध होकर चैनी की बंसी बजाने लगे तो रोमन सम्राट नीरो की कहानी स्वाभाविक रूप से चर्चा में आती और चरितार्थ होती दिखायी पड़ रही है.
पूर्व मध्य रेलवे का विधुत विभाग के काले कारनामे “अंधेर नगरी” का ही दर्शन करा रहे हैं । दानापुर मंडल के टीआरएस विभाग की अनियमितता, अराजकता, और भ्रष्टाचार “अंधेर नगरी” का दर्शन करने के लिए पर्याप्त है।
एक सीएलआई पांच सेक्शन का इंचार्ज
सुनकर आश्चर्य होता हैं कि एक व्यक्ति पांच जगहों का इंचार्ज है लेकिन यह दानापुर के टीआरएस विभाग की हकीकत है। शशिधर प्रसाद,चीफ लोकों इंस्पेक्टर के पद पर पदासीन है और आरसीडी, राजेन्द्र नगर,चीफ क्रू कंट्रोलर, राजेंद्रनगर, रनिंग रूम इंचार्ज, राजेन्द्र नगर,चीफ क्रू कंट्रोलर, पटना जंक्शन, रनिंग रूम इंचार्ज, पटना जंक्शन के रूप में कार्यरत हैं । बात हैरान करने वाली है कि नहीं लेकिन यहां की व्यवस्था के आगे रेलवे बोर्ड का आदेश भी कोई मायने नहीं रखता है । रेलवे बोर्ड का आदेश है कि ड्राफ्टेड को ही चीफ क्रू कंट्रोलर और रनिंग रूम का इंचार्ज बनाया जा सकता है तब फिर एक चीफ लोकों इंस्पेक्टर को दो दो जगह का चीफ़ क्रू कंट्रोलर और रनिंग रूम का इंचार्ज बना देना अराजकता नहीं तो क्या है! और वो भी तब जब मंडल में चीफ लोकों इंस्पेक्टर की कमी हो और चीफ लोकों इंस्पेक्टर की कमी का क्या प्रभाव पड़ रहा है वो लोकों पायलटों द्वारा रेड सिग्नल पार करने की संख्या से जाना जा सकता है ।

स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन में भी मनमानी
कार्मिक विभाग के स्थापना आदेश संख्या 137/2025 , दिनांक 07.04.2025 के माध्यम से 87 लोकों पायलट शंटर को लोकों पायलट गुड्स में पदोन्नति और पदस्थापना आदेश जारी किया गया, पदस्थापना आदेश निर्गत करने में मनमानी किया गया और स्पाउज ग्राउंड वाले के पदस्थापना में भेदभाव किया गया जो कि आम बात है।07.04.2025 को आदेश जारी किया गया, छः महीने से ज्यादा हों गया लेकिन अभी भी लगभग छः सात लोकों पायलट अपने पदस्थापना स्थल के लिए विरमित नहीं किए गए हैं, क्यों नहीं किए गए हैं यह भी पूंछने की बात तो नहीं लेकिन जानने की बात है।
पी कौशल,चीफ लोकों इंस्पेक्टर को मुख्यालय दानापुर से 28.08.2025 को ही हटा दिया गया है लेकिन उनका पदस्थापना आदेश जारी नहीं करना अराजकता नहीं तो और क्या है!
पी कौशल चीफ लोकों इंस्पेक्टर के शागिर्द राजेश नंदन सहाय लोकों पायलट शंटर का लोकों पायलट गुड्स में पदोन्नति और पदस्थापना आदेश जो 07.04.2025 को जारी हुआ,अभी तक तिलैया के लिए विरमित नहीं किया जाना अराजकता नहीं तो और क्या है!
कार्मिक विभाग के स्थापना कार्यालय आदेश संख्या 692/2025 दिनांक 03.10.2025 को राजगीर, बक्सर और बाढ़ से 31 सहायक लोको पायलट का स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर किया गया लेकिन पुनः स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन में भेदभाव किया गया। स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद लगभग 15 दिनों तक अनुपस्थित रहने के बाद स्थानांतरण आदेश में वर्णित 31वे स्थान पर अंकित शंकर कुमार सहायक लोको पायलट बक्सर में पुनः किसके आदेश से ज्वायन किया?यह अराजकता नहीं तो क्या है!
उपरोक्त वर्णित अराजकता तो कुछ भी नहीं है।
चीफ टीएलसी (कंट्रोल) राजेश प्रसाद लगभग 20 सालों से ट्रेन नहीं चलाया है, बिना ट्रेन चलाए पदोन्नति भी पा चुके हैं, कंट्रोल में ही है, इतने-इतने लम्बे समय तक एक ही जगह पदस्थापना अराजकता की पराकाष्ठा नहीं तो क्या है।
ऐसा भी नहीं है कि लम्बे समयांतराल से राजेश प्रसाद ही कंट्रोल में पदस्थापित है,टीएलसी में पदस्थापित सभी लगभग 15 सालों से ज्यादा समय से पदस्थापित है फिर भी उनको नहीं दिखता जिन्हें दिखना चाहिए।

ऐसा नहीं है कि अराजकता के खिलाफ आवाज नहीं उठती है, आवाज तो उठती है लेकिन अराजकता के खिलाफ आवाज उठाने वाले को वरीय मंडल विधुत अभियंता टीआरएस (परिचालन) के दरबार में पेशी झेलनी पड़ती है। यह कोई कहानी नहीं हकीकत है अभी कुछ दिनों पहले किऊल में पदस्थापित एक सहायक लोको पायलट ने रनिंग रुम की अव्यवस्था पर सवाल उठाया तो उसे वरीय मंडल विधुत अभियंता टीआरएस (परिचालन) के दरबार में पेशी झेलनी पड़ी और दानापुर मंडल के “नामदार”ईमानदार अधिकारी ने स्पष्ट हिदायत देते हुए कहा कि नौकरी करना है तो चुपचाप नौकरी करो यदि ज्यादा सवाल उठाओगे तो नौकरी करना मुश्किल कर देंगे।
अब सोचिए यदि किसी को ऐसी स्पष्ट हिदायत मिल जाए तो फिर कभी व्यवस्था पर सवाल उठा सकता है कदापि नहीं लेकिन इससे बड़ा अराजकता क्या हो सकता है तब समझा जा सकता है कि मंडल में रनिंग रूम की क्या हालत होगी!
ऐसा भी नहीं है कि पूर्व मध्य रेलवे का विधुत विभाग टीआरएस विभाग, दानापुर के दशा,दिशा और दुर्दशा से अवगत नहीं है, अवगत तो है लेकिन विवशता है, विवशता क्या है समझा जा सकता है और वो जगजाहिर हो चुका है।
क्या ऐसे ही चलेगा रेल!

