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Home » पेपर लीक माफिया पर शिकंजा : मोदी कैबिनेट की मंजूरी, अब मिलेगी 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ का जुर्माना
देश/दुनिया

पेपर लीक माफिया पर शिकंजा : मोदी कैबिनेट की मंजूरी, अब मिलेगी 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ का जुर्माना

Ocean News DeskBy Ocean News DeskJuly 24, 2026
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नई दिल्ली: देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक विवादों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधनों को मंजूरी दे दी गई है. सरकार संसद के मौजूदा मानसून सत्र के दौरान इस संशोधित विधेयक को पेश करने की तैयारी में है. इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बहाल करना और धोखाधड़ी में शामिल संगठित गिरोहों में डर पैदा करना है.

1. 10 साल की सजा और 10 करोड़ का जुर्माना: माफिया पर बड़ा प्रहार

संशोधित कानून के तहत पेपर लीक से जुड़े अपराधों को बेहद संगीन माना गया है. इसमें संगठित अपराध और पेपर लीक माफिया के खिलाफ कड़े से कड़े दंड का प्रावधान शामिल किया गया है:

  • सख्त सजा: पेपर लीक या नकल कराने वाले गिरोहों को न्यूनतम 5 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की जेल की सजा होगी.
  • भारी जुर्माना: दोषियों पर 10 करोड़ रुपये तक का आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है.
  • गैर-जमानती अपराध: इस कानून के तहत सभी अपराध गैर-जमानती (Non-Bailable) होंगे और इनमें किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा.
  • जांच का स्तर: मामलों की जांच डीएसपी (DSP) या उससे उच्च श्रेणी के अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी.
  • परीक्षा एजेंसियों पर कार्रवाई: दोषी पाई जाने वाली एजेंसियों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ परीक्षा कराने पर 4 साल का प्रतिबंध लगाया जाएगा.

2. पीएम मोदी का संदेश और फास्ट ट्रैक कोर्ट: 3 महीने में आएगा फैसला

नीट (NEET) परीक्षा से उपजे विवाद और छात्रों के आक्रोश के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने देर रात छात्रों को संबोधित करते हुए एक वीडियो संदेश साझा किया. प्रधानमंत्री ने छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाते हुए कई मुख्य बातें रखीं:

  • छात्रों की पीड़ा पर संवेदनशीलता: पीएम ने कहा कि पेपर लीक लाखों युवाओं के भविष्य और उनके परिजनों के संघर्ष से जुड़ा एक गंभीर विषय है. सरकार ने पिछले कुछ महीनों में दोषियों को जेल भेजने का काम किया है.
  • फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना: पेपर लीक से संबंधित मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी.
  • समयबद्ध न्याय: इन अदालतों के लिए 3 महीने के भीतर केस का निपटारा कर सजा सुनाना अनिवार्य होगा, ताकि छात्रों को समय पर न्याय मिल सके और उनका साल बर्बाद न हो.

3. पुराने कानून से कितना अलग और प्रभावी होगा नया बिल?

देश में 21 जून 2024 से पहले ही लोक परीक्षा अधिनियम लागू है, लेकिन नए संशोधन इसे और अधिक असरदार और व्यापक बनाते हैं:

  • संगठित गिरोहों पर फोकस: पुराना कानून सामान्य धांधली पर भी केंद्रित था, जबकि यह संशोधन मुख्य रूप से पेपर लीक करने वाले सिंडिकेट, कोचिंग संस्थानों की सांठगांठ और तकनीकी सेंधमारी को लक्षित करता है.
  • जवाबदेही और हर्जाना: परीक्षा कराने वाली एजेंसियों या थर्ड-पार्टी वेंडरों की लापरवाही पाए जाने पर परीक्षा कराने की पूरी लागत उन्हीं से वसूल की जाएगी.
  • आंदोलन और सीबीआई जांच: जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों के जारी विरोध और सीबीआई की निरंतर जांच के बीच इस संशोधित बिल का पास होना परीक्षाओं की विश्वसनीयता स्थापित करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
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