काठमांडू. नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में ल्हेंडे खोला और भोटेकोशी नदी प्रणाली में अचानक आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड (फ्लैश फ्लड/जलप्रलय) ने भारी तबाही मचाई है. इस प्राकृतिक आपदा के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 389 तक पहुंच गई है, जबकि स्थानीय नागरिकों और विदेशी पर्यटकों सहित 1500 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. इस आपदा ने नेपाल के बुनियादी ढांचे, सड़कों, पुलों और कई जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है.
आपदा के मुख्य कारण और भौगोलिक स्थिति
यह भयानक जलप्रलय किसी आम मानसूनी बारिश का परिणाम नहीं था, बल्कि भूवैज्ञानिक और उपग्रह विश्लेषण के अनुसार तिब्बत की तरफ ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियर के टूटने (Glacial Collapse) और उसके बाद हुए भारी मलबे के बहाव (Debris Flow) के कारण उत्पन्न हुआ था. भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक पानी का स्तर इस कदर बढ़ा कि महज 30 मिनट के भीतर पानी की रफ्तार और जलस्तर कई मीटर ऊपर उठ गया. नेपाल के रसुवा और धाडिंग जिले इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा नुवाकोट, चितवन और नवलपरासी तक इसका असर देखा गया है.
राहत एवं बचाव कार्य
विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने युद्ध स्तर पर राहत अभियान शुरू किया है:
- सुरक्षा बलों की तैनाती: स्थिति से निपटने के लिए नेपाल पुलिस, नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल के लगभग 13,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को मैदान में उतारा गया है.
- ड्रोन और हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल: दुर्गम इलाकों और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है और सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए सैंकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.
- नागरिकों और पर्यटकों की वापसी: विभिन्न राज्यों के फंसे हुए पर्यटकों (जैसे महाराष्ट्र के काठमांडू में फंसे 106 नागपुरी पर्यटकों) को विशेष बसों और ट्रेनों के जरिए सुरक्षित उनके गृह राज्य भेजा जा रहा है. साथ ही, विदेश मंत्रालय ने विदेशी नागरिकों के लिए विशेष आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर और व्हाट्सएप डेस्क जारी किए हैं.
दूसरे देशों की मदद के प्रस्ताव पर नेपाल का रुख
इस भीषण मानवीय संकट के दौरान भारत, श्रीलंका (जिसने 10 लाख डॉलर की वित्तीय सहायता की घोषणा की है) समेत कई अंतरराष्ट्रीय समुदायों ने राहत और बचाव कार्यों में सीधी मदद की पेशकश बढ़ाई है.
हालांकि, तमाम वैश्विक प्रस्तावों के बीच नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी अपनी सुरक्षा एजेंसियां, नेपाल सेना और पुलिस जमीनी स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन्स को अंजाम देने में पूरी तरह सक्षम हैं. नेपाली अधिकारियों का कहना है कि उनकी प्रशिक्षित टीमें दुर्गम इलाकों में बहादुरी से राहत कार्यों में जुटी हैं, और इस चरण में उन्हें केवल चिकित्सा आपूर्ति, राहत सामग्री और बुनियादी ढांचे को बहाल करने के लिए तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है.
सीमावर्ती इलाकों में लगातार आ रहे छोटे भूकंपीय झटकों और नदियों के ऊपरी हिस्सों में कृत्रिम झीलें (Lakes) बनने के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है.





