कोलकता. कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए सरकारी बैंकों में पार्टी के 804 करोड़ रुपए वाले 4 बैंक खातों के संचालन पर रोक हटाने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि ऐसी राहत से उसके पिछले आदेश का उद्देश्य कमजोर होगा. मामले पर दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद फिर सुनवाई होगी.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) को एक बार फिर से तगड़ा कानूनी झटका लगा है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने सरकारी बैंकों में मौजूद पार्टी के 4 बैंक खातों के संचालन यानी ऑपरेशन पर लगी रोक को हटाने से साफ इनकार कर दिया है. इन खातों में कुल मिलाकर 804 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि जमा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट ने 7 जुलाई 2026 को याचिका दायर कर इन खातों से पैसों की निकासी और इस्तेमाल पर लगी रोक को चुनौती दी थी, जिसे अदालत ने फिलहाल राहत देने से मना कर दिया है.
पिछले आदेश के उद्देश्य पर पड़ेगा असर: न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य
इस पूरे मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि यदि इन चारों खातों के संचालन की अनुमति दी जाती है, तो यह उनके अपने ही पूर्ववर्ती आदेश को त्रुटिपूर्ण बना देगा. अदालत ने याद दिलाया कि अपने 9 जुलाई के आदेश के तहत उन्होंने पहले ही एक विशेष अधिकारी नियुक्त कर दिया है, जो पार्टी के रोजमर्रा के खर्चों को सुचारू रूप से चलाने और अन्य 3 खातों से जरूरी भुगतानों का निपटारा देखने के लिए अधिकृत है. जब पार्टी के दैनिक कामकाज और खर्चों के प्रबंधन के लिए पहले से ही व्यवस्था की जा चुकी है, ऐसे में इन अतिरिक्त 4 खातों के संबंध में किसी भी प्रकार की नई राहत या ढील देने की कोई आवश्यकता नहीं है.
पुलिस जांच और राज्य सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया कि यह पूरी कार्रवाई एक आपराधिक मामले के अंतर्गत कानून के दायरे में रहकर की गई है. सरकार ने अनुरोध किया कि पुलिस और जांच एजेंसियों को बिना किसी हस्तक्षेप के अपनी निष्पक्ष जांच जारी रखने की पूरी छूट मिलनी चाहिए. इस सिलसिले में बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर अपराध थाने की तरफ से जांच से जुड़ी एक विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष पेश की गई. टीएमसी की ओर से दलील दी गई थी कि इन खातों के संचालन पर रोक लगाने वाली प्राथमिकी में कुछ तकनीकी खामियां हैं, जिसके आधार पर उन्हें वित्तीय कामकाज की छूट दी जानी चाहिए, लेकिन अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया.
पहले से फ्रीज अन्य खातों का विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रिया
उल्लेखनीय है कि यह कानूनी संघर्ष केवल सरकारी बैंकों तक सीमित नहीं है. इससे पहले राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के तहत निजी बैंकों में मौजूद टीएमसी के 3 अन्य खातों से धन की निकासी पर भी रोक लगाई जा चुकी है, जिनमें लगभग 440 करोड़ रुपए जमा हैं. तृणमूल कांग्रेस लगातार इन सभी कार्यवाहियों को राजनीतिक प्रतिशोध और विपक्षी साजिश करार देती रही है, जबकि दूसरी ओर अदालती सख्ती के कारण पार्टी की वित्तीय मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. इस मामले की अगली सुनवाई अब दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद होगी, जिसके लिए अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. छुट्टी के बाद होने वाली इन सुनवाइयों पर ही यह तय होगा कि पार्टी के इन करोड़ों रुपए के खातों की कानूनी स्थिति आगे क्या रुख अख्तियार करती है.





