जमशेदपुर/नई दिल्ली. नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में कथित पेपर लीक और बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं को लेकर देशभर के छात्रों और डॉक्टरों का गुस्सा अब थमने का नाम नहीं ले रहा है. राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश के कोने-कोने तक पहुँच चुका है. इसी कड़ी में औद्योगिक नगरी जमशेदपुर स्थित एमजीएम (MGM) मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने भी अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है.
बुधवार को एमजीएम अस्पताल परिसर में एकत्रित होकर जूनियर डॉक्टरों ने केंद्र सरकार और परीक्षा तंत्र के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व JDA के डॉ. सचिन सेठ ने किया. डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने छात्रों की मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है.
“शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर लगा दाग”
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए डॉ. सचिन सेठ और अन्य वक्ताओं ने कहा कि NEET केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि देश के लाखों होनहार युवाओं के भविष्य और डॉक्टर बनने के सपने का आधार है. इसमें कथित पेपर लीक और धांधली की खबरों ने पूरी राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर दिया है. डॉक्टरों ने कहा, “जब योग्य और मेधावी अभ्यर्थियों का भरोसा देश की पारदर्शी परीक्षा प्रणाली से उठने लगेगा, तो इसका दूरगामी और भयानक असर केवल छात्रों पर ही नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा और चिकित्सा तंत्र पर पड़ेगा.”
दिल्ली में लाठीचार्ज पर फूटा गुस्सा
एमजीएम के डॉक्टरों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करा रहे छात्रों और युवा डॉक्टरों पर हुए कथित लाठीचार्ज और पुलिस बल प्रयोग की तीखी आलोचना की. डॉक्टरों ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में अपने अधिकारों और भविष्य के लिए आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है.
छात्रों पर लाठी भांजने और उन्हें प्रताड़ित करने की घटना अत्यंत निंदनीय है. राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस आंदोलन में घायल हुए छात्रों और चिकित्सा कर्मियों को तुरंत बेहतर इलाज मिलना चाहिए. सरकार को टकराव का रास्ता छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए.
JDA की सरकार से 3 प्रमुख मांगें
- निष्पक्ष एवं त्वरित जांच: NEET पेपर लीक और अनियमितताओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा इसमें शामिल दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए.
- छात्रों से तुरंत संवाद: सरकार तुरंत आंदोलनकारी छात्रों और उनके प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत करे और उनकी शंकाओं का समाधान करे.
- घायलों को तत्काल इलाज: लाठीचार्ज में घायल हुए छात्रों और डॉक्टरों का बिना देरी के समुचित एवं निशुल्क इलाज सुनिश्चित किया जाए.
राष्ट्रीय स्तर पर बन रहा मजबूत मोर्चा
उल्लेखनीय है कि देश की राजधानी दिल्ली में NEET मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़कों तक संग्राम छिड़ा हुआ है. जमशेदपुर में एमजीएम के डॉक्टरों का यह विरोध दर्शाता है कि अब यह मुद्दा केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश का पूरा मेडिकल समुदाय उनके समर्थन में आ खड़ा हुआ है.
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि वे चिकित्सा शिक्षा की गरिमा, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अंत तक संघर्ष करेंगे. उन्होंने सरकार से मांग की कि परीक्षा प्रणाली को फुलप्रूफ और जवाबदेह बनाया जाए ताकि किसी भी मेधावी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके.
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