- पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते से सीआईडी पूछताछ जारी, नये खुलासे की ओर बढ़ रही जांच
रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में लंबे समय से ठप पड़ी भर्ती प्रक्रियाओं को जल्द ही नया मोड़ मिल सकता है. राज्य प्रशासनिक हलकों में तेजी से चल रही सुगबुगाहट के अनुसार, झारखंड विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के आगाज से पहले जेपीएससी के नए अध्यक्ष का फैसला लिया जा सकता है. आयोग में शीर्ष पद खाली होने के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अटका हुआ है, जिसे देखते हुए राज्य सरकार जल्द से जल्द इस पद को भरने की तैयारी में जुटी है.
साफ-सुथरी छवि वाले पूर्व अधिकारी की तलाश
सूत्रों की मानें तो सरकार इस बार किसी ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपने के मूड में है, जिनका कार्यकाल पूरी तरह विवादरहित और निष्कलंक रहा हो. इसके लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के साथ-साथ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारियों के नामों पर भी विचार-विमर्श जारी है. राज्य सरकार की मंशा एक ऐसे प्रशासनिक चेहरे को कमान सौंपने की है, जो न केवल निष्पक्षता से परीक्षाएं आयोजित करा सके, बल्कि आयोग की साख को भी नए सिरे से स्थापित कर सके.
क्यों पैदा हुआ संकट?
गौरतलब है कि 21 जुलाई को पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते के अचानक पद से इस्तीफा देने के बाद से जेपीएससी में अध्यक्ष का पद खाली पड़ा है. इस प्रशासनिक खालीपन के कारण आयोग का कामकाज पूरी तरह प्रभावित हुआ है. इतना ही नहीं, पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते को हाल ही में सीआईडी (CID) द्वारा पूछताछ के लिए भी बुलाया गया है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है. उनकी से पूछताछ जारी है.
टली परीक्षाओं पर अभ्यर्थियों की टिकी नजरें
अध्यक्ष पद के रिक्त होने की सबसे बड़ी गाज राज्य के युवाओं पर गिरी है. आयोग ने अगस्त और सितंबर महीने में प्रस्तावित करीब सात मुख्य परीक्षाओं और साक्षात्कारों को स्थगित कर दिया है. नए अध्यक्ष के पदभार ग्रहण किए बिना इन परीक्षाओं की नई तिथियां जारी होना संभव नहीं है. इसके अलावा, कई अन्य सरकारी विभागों में प्रस्तावित नई नियुक्तियों की फाइलें भी अटकी पड़ी हैं.
मानसून सत्र में विपक्ष को मुद्दा न देने की रणनीति
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि मानसून सत्र शुरू होने तक आयोग के अध्यक्ष का पद खाली रहता है, तो विपक्ष इसे विधानसभा में बड़ा मुद्दा बना सकता है. सरकार इस संभावित घेराबंदी से बचना चाहती है. इसलिए माना जा रहा है कि मानसून सत्र से ठीक पहले होने वाली कैबिनेट बैठक में नए अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगाई जा सकती है.
फिलहाल आयोग में तीन सदस्य अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और जमाल अहमद कार्यरत हैं. यदि स्थाई अध्यक्ष के चयन में कुछ दिनों की देरी होती है, तो तब तक के लिए इन्हीं सदस्यों में से किसी एक को कार्यवाहक अध्यक्ष का प्रभार भी सौंपा जा सकता है.
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