24 दिनों से जारी JPSC-JSSC आंदोलन एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया. छात्रों ने 18 अगस्त तक ठोस फैसले का समय दिया है. यदि चौथे दौर की बातचीत में कोई सहमति नहीं बनती, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव तय माना जा रहा है.
रांची. झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में सोमवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब 24 दिनों से जारी JPSC-JSSC आंदोलन एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया. राजभवन के बाहर महीनों से शांत गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों ने अब अपने तेवर सख्त कर लिए हैं.
छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे अहिंसात्मक मार्ग यानी ‘गांधी के रास्ते’ को छोड़ ‘भगत सिंह के आदर्शों’ को अपनाएंगे. छात्रों के इस बदले अंदाज और 20 अगस्त को प्रस्तावित ‘मुख्यमंत्री आवास घेराव’ के ऐलान ने राज्य सरकार की सांसें अटका दी हैं.
प्रोजेक्ट भवन से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक बना सस्पेंस
प्रशासनिक स्तर पर सोमवार को उस समय एक अजीब स्थिति पैदा हो गई, जब सरकार की ओर से 10 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए राजकीय अतिथिशाला (स्टेट गेस्ट हाउस) बुलावा भेजा गया. जिला प्रशासन का वाहन छात्रों को लेने पहुंचा, प्रतिनिधिमंडल गाड़ी में सवार भी हो गया, लेकिन अंतिम समय पर वाहन को रोककर छात्रों को नीचे उतार दिया गया. अपरिहार्य कारणों का हवाला देकर वार्ता को बीच में ही रोक दिया गया.
छात्र आंदोलनकारी देवेंद्र ने सहयोगियों से कहा है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल मौजूदा विवाद को खत्म करना नहीं है. झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की ऐसी व्यवस्था बने, जिस पर आने वाले अभ्यर्थी भरोसा कर सकें. इसलिए वार्ता में किसी भी समझौते में सिस्टम में स्थायी सुधार को प्राथमिकता दी जाये.
अचानक बातचीत रुकने से नाराज छात्र प्रतिनिधि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बैठकर सरकार के अगले कदम का इंतजार करने लगे. प्रशासनिक तालमेल की इस कमी ने छात्रों के असंतोष को और हवा दे दी है, वहीं राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आखिर ऐन मौके पर सरकार को अपने कदम क्यों पीछे खींचने पड़े.
कैबिनेट की आपात बैठक और राजनीतिक बिसात
वार्ता रुकने का मुख्य कारण मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा प्रोजेक्ट भवन में बुलाई गई मंत्रिपरिषद की अचानक आपात बैठक रही. शाम 4:30 बजे शुरू हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में शहर में मौजूद सभी मंत्रियों को तलब किया गया. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बैठक का आधिकारिक एजेंडा भले ही खान एवं खनिज संशोधन विधेयक रहा हो, लेकिन इसके पीछे की असली वजह छात्रों का बढ़ता जनाक्रोश और 20 अगस्त का अल्टीमेटम ही माना जा रहा है.
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चार मंत्रियों (सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा) की कमेटी को छात्रों के सामने उतारने से पहले मुख्यमंत्री अपनी पूरी रणनीति स्पष्ट कर लेना चाहते हैं. इससे पूर्व की तीन दौर की वार्ताएं बेनतीजा रही हैं. परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और पूरी भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता लाने की मांगों पर पेंच फंसा हुआ है.
20 अगस्त की डेडलाइन, क्या टूटेगा गतिरोध?
झारखंड सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है एक तरफ प्रशासनिक साख बचाना और दूसरी तरफ युवाओं के इस जनाक्रोश को राजनीतिक रूप से बेकाबू होने से रोकना. छात्रों ने 18 अगस्त तक ठोस फैसले का समय दिया है. यदि चौथे दौर की बातचीत में कोई सहमति नहीं बनती, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव तय माना जा रहा है.
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री की इस आपात बैठक के बाद क्या सरकार कोई बीच का रास्ता निकाल पाती है या छात्रों का यह ‘भगत सिंह वाला रुख’ राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल लेकर आएगा.


