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Home » जियाडा की अहम बैठक : लीज नवीकरण के नियमों में बदलाव, अब 6 महीने पहले मिलेगी अग्रिम सूचना
झारखंड

जियाडा की अहम बैठक : लीज नवीकरण के नियमों में बदलाव, अब 6 महीने पहले मिलेगी अग्रिम सूचना

Ocean News DeskBy Ocean News DeskAugust 9, 2026
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  • Jamshedpur JIADA Regulations 2026 के नये मसौदे पर एमडी ने उद्योग संगठनों के साथ की व्यापक चर्चा

जमशेदपुर/आदित्यपुर. जमशेदपुर में औद्योगिक विकास को गति देने और उद्यमियों की सहूलियत के लिए आदित्यपुर-औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (जियाडा) की अहम बैठक बुलायी गयी. इसमें नए रेगुलेशंस 2026 के मसौदे को अंतिम रूप देने और कारोबार को सुगम बनाने को लेकर एमडी वरुण रंजन की अध्यक्षता में उद्यमियों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा के बाद कई बड़े निर्णय लिए गए.

बैठक में सबसे बड़ा निर्णय यह लिया गया कि लीज की अवधि समाप्त होने पर जियाडा लीज रिन्यूअल के लिए छह माह पूर्व सूचना भेजेगा ताकि उद्यमियों को पेनल्टी का सामना न करना पड़े. चर्चा में जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन और क्षेत्रीय उप निदेशक दिनेश रंजन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. दूसरी ओर, उद्योग जगत की तरफ से चेंबर अध्यक्ष मानव केडिया, उपाध्यक्ष हर्ष बकरेवाल, सचिव विनोद शर्मा के साथ-साथ ‘एसिया’ (ASIA), ‘लघु उद्योग भारती’, ‘आइएसआरओ’ और ‘एफजेसीसीआइ’ का प्रतिनिधित्व रहा.

उत्पादनरत इकाइयों के लिए विशेष राहत और डीम्ड आइओपी

वर्ष 2016 के नियमों के तहत आवंटित और उत्पादन शुरू कर चुकी ऐसी इकाइयां, जिनका डीओपी या आइओपी औपचारिक रूप से दर्ज नहीं हो पाया है, उन्हें बड़ी राहत दी गई है. ऐसी कंपनियां अधिसूचना जारी होने के छह महीने के भीतर आइओपी प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकेंगी. बिजली की खपत, जीएसटीएन रिटर्न और ईपीएफओ के रिकॉर्ड के आधार पर ‘डीम्ड आइओपी प्रमाण-पत्र’ जारी किया जाएगा. इससे ये इकाइयां परफॉर्मिंग एलॉटी सर्टिफिकेशन, नवीकरण और पेनल रेंट जैसे लाभ ले सकेंगी, हालांकि पुराना बकाया माफ नहीं होगा.

क्षेत्रीय वर्गीकरण और भूमि दरों का निर्धारण

औद्योगिक क्षेत्रों को निवेशक की मांग के आधार पर चार श्रेणियों   सैचुरेटेड, एक्टिव, इमर्जिंग और प्रायोरिटी जोन में बांटा जाएगा, जिसका सीधा असर भूमि की दरों पर पड़ेगा.

राजमार्ग के पास स्थित भूखंडों को प्राइम प्लॉट मानते हुए ए+, ए, बी+ और बी श्रेणियों में रखा गया है. इन भूखंडों के बेस प्राइस पर क्रमशः 20%, 15%, 10% और 5% तक प्रीमियम जोड़े जाने तथा प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से आवंटन का प्रावधान तय किया गया है.

आरक्षण के प्रावधान और शुल्क संरचना

  • भूमि आवंटन में कमजोर और विशिष्ट वर्गों के लिए विशेष आरक्षण तय किया गया है
  • सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए 40% भूखंड आरक्षित रहेंगे
  • विस्थापित परिवारों (PAF), एससी/एसटी उद्यमियों और महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए 10%-10% आरक्षण का प्रावधान है.

आवंटन मूल्य में लैंडलीज प्रीमियम के अलावा जियाडा चार्जेज के रूप में एलएलपी का 12% हिस्सा निश्चित और गैर-रियायती रूप से लागू होगा. इसमें इंस्टीट्यूशनल चार्जेज (7%), प्रोसेसिंग चार्ज (3%) और इन्वेस्टर फैसिलिटेशन चार्ज (2%) शामिल हैं. इसके अलावा, लैंड रेंट और मेंटेनेंस चार्ज में हर साल स्वतः 5% की वृद्धि होगी तथा भूमि लागत पर अधिकतम 50% तक की संचयी छूट सीमा पर भी बात हुई. विज्ञापन से पहले सड़क, नाली और सीमांकन जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी होनी अनिवार्य हैं.

स्वामित्व परिवर्तन और नई संयुक्त उद्यम (Joint Venture) व्यवस्था

  • हिस्सेदारी में बदलाव: मूल आवंटी की हिस्सेदारी 50% या उससे अधिक रहने पर मात्र 10,000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस देकर केवल सूचना देनी होगी. 25% से 49% हिस्सेदारी हस्तांतरित करने पर प्रचलित एलएलपी का 5% शुल्क और एमडी की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी.
  • संयुक्त उद्यम (Tier System): जियाडा के इतिहास में पहली बार जेवी और सब-लीज जैसी योजनाएं शामिल की जा रही हैं. इसमें टीयर ए (26% तक इक्विटी) पर केवल प्रोसेसिंग फीस, टीयर बी (26% से 49% इक्विटी) पर एमडी की अनुमति के साथ 3% से 10% तक जेवी फीस लगेगी. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर या रोजगार-सघन इकाइयों को इसमें 15% से लेकर पूर्ण छूट तक की रियायत मिलेगी.

सब-लीज और भूखंडों के हस्तांतरण के नियम

उप-पट्टा (Sub Lease): निर्मित क्षेत्र के 10% हिस्से तक बिना किसी शुल्क के सिर्फ सूचना देना पर्याप्त होगा. 30% तक के क्षेत्र के लिए अनुमति के साथ वार्षिक भाड़े का 5% शुल्क देना होगा. इसके लिए न्यूनतम 60% उत्पादन क्षमता की शर्त पूरी करनी जरूरी है.

हस्तांतरण शुल्क: मानक ट्रांसफर पर ट्रांसफर प्राइस का 15% शुल्क देय होगा, जिस पर समय अवधि (3 से 10 वर्ष या उससे अधिक) के आधार पर 70% तक की छूट मिल सकेगी. समूह के भीतर ट्रांसफर पर मात्र 5% शुल्क तय किया गया है.

बीमार इकाइयों का पुनरुद्धार और अन्य निर्देश

बंद या बीमार पड़ी इकाइयों को दोबारा पटरी पर लाने के लिए ‘सिक यूनिट रिवाइवल’ योजना लाई गई है. इसके तहत इकाइयों को 12 से 24 महीने की मोहलत दी जाएगी, जिसमें पेनल रेंट पूरी तरह माफ होगा और मूल बकाये के 80% भुगतान पर वन-टाइम सेटलमेंट की सुविधा मिलेगी.

बैठक के अंत में उद्योग संगठनों ने नियमों को पूरी तरह पारदर्शी और सरल बनाने पर जोर दिया. एमडी वरुण रंजन ने सभी के सुझावों को सकारात्मक रूप से लेते हुए आश्वस्त किया कि रेगुलेशंस को अंतिम रूप देते समय इन सभी बिंदुओं को गंभीरता से शामिल किया जाएगा.

जियाडा का यह नया कदम उद्यमियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है. लीज रिन्यूअल प्रक्रिया को सुगम बनाने और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने से जमशेदपुर के औद्योगिक माहौल में सकारात्मक बदलाव आएगा. इससे क्षेत्र के उद्यमियों को व्यापार करने में आसानी होगी और स्थानीय स्तर पर औद्योगिक विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी.

बैठक में यह निर्णय भी

  • ब्लड रिलेशन का नियम: उद्योगों पर उद्यमी के परिवार के हक को लेकर ब्लड रिलेशन के मामले में जियाडा पहले पन्नी को भी नहीं मानता था, लेकिन अब जियाडा के नए रेगुलेशन में आयकर विभाग के नियमों को अपनाया जाएगा.
  • फैक्ट्री इंस्पेक्टर का नक्शा: उद्योग लगाते समय फैक्ट्री इंस्पेक्टर द्वारा पारित ही नक्शा पर ही काम होगा, साथ ही डेथ ऑफ प्रोडक्शन (डीओपी) की जमीन इनिशिएटिव ऑफ प्रोडक्शन (ईओपी) को अपनाने पर सहमति बनी और करीब छह घंटे चली इस बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर एमडी ने सहमति जताई.
  • औद्योगिक क्षेत्र की सफाई के लिए एजेंसी का चयन: जियाडा क्षेत्र में साफ-सफाई की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक विशेष एजेंसी का चयन किया गया है, जो औद्योगिक क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों, गलियों, नालियों व नालों आदि की सफाई करेगी और इसकी निगरानी क्षेत्रीय कार्यालय से की जाएगी.
  • बुनियादी ढांचे का विकास: स्ट्रीट लाइट के लिए फिर टेंडर किया गया है, सुरक्षा व्यवस्था के रखरखाव के लिए प्राक्कलन तैयार किया जायेगा और इसके रख-रखाव के लिए सेवानिवृत्त इंजीनियरों की सेवा ली जाएगी.
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