जमशेदपुर/रांची.
घर की तंगहाली को दूर करने और अपनों के चेहरे पर मुस्कान लाने की उम्मीद लिए विदेश की धरती पर गए झारखंड के दो होनहार युवकों की एक सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई है.
इस हृदयविदारक घटना ने राजधानी रांची के राजा कुमार और जमशेदपुर के कदमा शास्त्रीनगर निवासी विनय यादव के परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है. वियतनाम में योग शिक्षक के रूप में अपनी मेहनत की रोटी कमा रहे इन दोनों युवाओं की असमय विदाई ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है.
विदेश जाने की मजबूरी और सपनों का टूटना
मध्यम वर्गीय और सामान्य परिवारों से ताल्लुक रखने वाले युवा अक्सर अपने घर की आर्थिक तंगहाली से लड़ने और परिवार को आर्थिक सबलता प्रदान करने के लिए देश की सरहदें लांघकर दूर-दराज के देशों का रुख करते हैं. इन युवाओं के मन में यह सपना होता है कि वे विदेश में कड़ी मेहनत कर अपनों का जीवन स्तर सुधारेंगे और भाई-बहनों का भविष्य सुरक्षित करेंगे.
रांची के राजा कुमार ने करीब चार साल तक कठिन योग प्रशिक्षण लिया था और विनय यादव के साथ वियतनाम में योग सिखाकर अपने वृद्ध माता-पिता और परिजनों का मुख्य सहारा बने हुए थे. वे नियमित रूप से अपने घर पैसे भेजते थे, जिससे घर का चूल्हा जलता था. लेकिन किसे पता था कि जिस विदेश की धरती पर वे उज्जवल भविष्य के सपने बुन रहे हैं, वही उनके लिए अंतिम साबित होगी.
25 सितंबर की वह काली शाम
मिली जानकारी के अनुसार, गत 25 सितंबर की शाम अपनी योग कक्षाएं समाप्त करने के बाद राजा कुमार और विनय यादव स्कूटी से अपने आवास लौट रहे थे. रास्ते में उनकी स्कूटी भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई. इस भीषण हादसे में रांची के राजा कुमार की मौके पर ही सांसें थम गईं, जबकि जमशेदपुर के विनय यादव गंभीर रूप से घायल हो गए.
उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जिंदगी और मौत के बीच कड़ा संघर्ष करने के बाद 26 सितंबर को विनय ने भी दम तोड़ दिया. इस एक हादसे ने दो परिवारों के इकलौते उम्मीद के चिरागों को हमेशा के लिए बुझा दिया.
शवों को वियतनाम से वतन लाने की भारी जद्दोजहद
विदेश में हुई इस अनहोनी की खबर जैसे ही झारखंड पहुंची, दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. माताओं की चीत्कार और परिजनों के क्रंदन से पूरा माहौल गमगीन हो गया है. अब परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने जिगर के टुकड़े के पार्थिव शरीर को वियतनाम से अपने पैतृक शहर लाने की है.
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, विदेश से शवों को भारत लाने की इस लंबी और कागजी प्रक्रिया में भारी-भरकम खर्च आ रहा है. राजा कुमार के परिजनों ने किसी तरह करीब 14 लाख रुपये की व्यवस्था की है, वहीं विनय यादव के परिवार के स्तर पर भी शव को स्वदेश लाने के लिए कड़ा संघर्ष किया जा रहा है.
स्टेट माइग्रेंट वर्कर्स कंट्रोल रूम के स्तर से भी हरसंभव मदद के प्रयास किए जा रहे हैं. इस दुखद हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रोजी-रोटी की तलाश में घर से दूर गए अपनों की ऐसी त्रासद मौत परिवारों को ताउम्र का गहरा आघात दे जाती है.



