रांची. राज्य में बालू के अवैध खनन और परिवहन के बीच एक नया प्रस्ताव सामने आया है. इस प्रस्ताव में यह निर्धारित किया जा रहा है कि सरकारी कार्य के लिए ठेकेदार दोगुनी रायल्टी देकर किसी भी घाट से बालू उठाव कर सकेंगे.
सरकार का दावा है कि इससे सरकारी निर्माण कार्यों को गति और बालू की किल्लत से निजात मिलेगी. खान विभाग की ओर से तैयार प्रस्ताव में यह कार्य सिर्फ सरकारी कार्यों के लिए होगा. डबल (दोगुनी) रॉयल्टी देकर किये गये बालू उठाव को वैध माना जायेगा. यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल (कैबिनेट) के पास भेजा जायेगा.
बालू की भारी मांग और वर्तमान व्यवस्था
राज्य में पथ निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) सहित विभिन्न सरकारी विकास कार्यों को पूरा करने के लिए हर साल लगभग 100 करोड़ फीट (CFT) बालू की आवश्यकता होती है. वर्तमान व्यवस्था के तहत वैध घाटों से पर्याप्त आपूर्ति न मिलने के कारण कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही थीं.
नई प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, ठेकेदार अपनी जरूरत के हिसाब से किसी भी चालू घाट से बालू उठा सकेंगे, बशर्ते वे निर्धारित दर से दोगुनी रॉयल्टी का भुगतान करें. पुरानी व्यवस्था में भी ठेकेदार किसी भी घाट से बालू का उठाव कर लेते थे और बाद में इसे नियमित कर दिया जाता था, लेकिन बीच में इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया था. अब खान विभाग ने नियमों में संशोधन कर इसे फिर से कानूनी जामा पहनाने की तैयारी की है.
वित्तीय और प्रशासनिक रूपरेखा
इस नीति के लागू होने से खनन क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है. वर्तमान में बालू घाटों की नीलामी के बाद अलग-अलग मदों से राजस्व प्राप्त होता है, जिसमें बेस प्राइस, सामान्य रॉयल्टी, अतिरिक्त रॉयल्टी (डबल रॉयल्टी का प्रावधान), मैनेजमेंट फीस, डीएमएफटी (DMFT), अवसंरचना और जीएसटी शामिल हैं.
प्रस्तावित नियमों के तहत, यदि कोई ठेकेदार अवैध तरीके से भी बालू का उठाव करता है, तो उसे नियमानुसार डबल रॉयल्टी और पेनाल्टी चुकाकर वैध करने का अवसर मिलेगा. इससे न केवल सरकारी खजाने को फायदा होगा, बल्कि विकास कार्यों में भी तेजी आएगी.
उल्लेखनीय है कि 23 अप्रैल 2026 को झारखंड लघु खनिज समुपदान नियमावली के नियम 55 और 56 में बालू के अवैध खनन को रोकने के लिए सख्त प्रावधान किए गए थे और पुरानी डबल रॉयल्टी की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया था. हालांकि, मैदानी हकीकत और बालू की भारी किल्लत को देखते हुए अब सरकार ने इसमें सुधार का निर्णय लिया है. कैबिनेट की मुहर लगने के बाद यह प्रस्ताव पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएगा.


