रांची. झारखंड की धरती से अब हिंसक और खौफनाक माओवादी ताकतों का साया लगातार सिमटता नजर आ रहा है.
राज्य के पुलिस मुख्यालय में 80वें स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर आयोजित गरिमामयी समारोह के दौरान पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने एक ऐसा उत्साहजनक और बड़ा खुलासा किया है, जो सुरक्षा एजेंसियों की शानदार सफलता को बयां करता है.
सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से लेकर 5 अगस्त तक चले कड़े अभियानों के बीच सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में कुल 22 कुख्यात नक्सली मुठभेड़ में ढेर किए जा चुके हैं.
इस ताबड़तोड़ और रणनीतिक कार्रवाई ने प्रतिबंधित संगठन के हौसले पूरी तरह पस्त कर दिए हैं.
आंकड़ों के आईने में सुरक्षाबलों की ऐतिहासिक जीत
पुलिस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस साल के शुरुआती महीनों में ही उग्रवाद के खिलाफ छेड़े गए विशेष अभियानों के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं.
जंगलों के भीतर सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और सटीक खुफिया तंत्र की बदौलत माओवादियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है.
- इस समयावधि के दौरान पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से छापामारी कर कुल 103 सक्रिय नक्सलियों को धर दबोचा है.
- हिंसा का रास्ता छोड़कर बेहतर भविष्य की तलाश में कुल 46 नक्सलियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का सराहनीय फैसला किया है.
- इसके अलावा, सुरक्षाबलों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ों में कुल 22 खूंखार माओवादियों को मौत के घाट उतार दिया गया है.
शीर्ष कमांडरों के खात्मे से बिखर गया पूरा संगठन
इस बार की कार्यवाहियों की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि सुरक्षाबलों ने केवल निचले स्तर के कैडरों को ही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर संगठन की रीढ़ माने जाने वाले शीर्ष और कुख्यात कमांडरों को निशाना बनाया है.
भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो का बेहद खतरनाक सदस्य मिसिर बेसरा, जिस पर सरकार की तरफ से एक करोड़ रुपये का भारी इनाम घोषित किया गया था, उसे पुलिस ने सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया है.
वहीं दूसरी तरफ, प्रतिबंधित संगठन की केंद्रीय समिति के सदस्य पतिराम मांझी को एक भीषण और लंबी चली मुठभेड़ में मार गिराया गया है.
इन बड़े चेहरों के शिकंजे में आने और खात्मा होने से झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में उग्रवादियों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है.
भारी मात्रा में आधुनिक हथियार और विस्फोटक जब्त
माओवादियों के नापाक मंसूबों को वक्त रहते कुचलने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीमों ने दुर्गम जंगलों में कई बड़े तलाशी अभियान चलाए हैं.
इन सघन छापों के दौरान नक्सलियों के गुप्त ठिकानों से अकूत मात्रा में गोला-बारूद और खतरनाक सामग्रियां बरामद की गई हैं.
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कुल 98 आधुनिक हथियार, 7,470 जिंदा कारतूस, 11 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, तीन संवर्धित विस्फोटक उपकरण (आईईडी) और जबरन वसूली के जरिए जुटाए गए 6 लाख रुपये नकद अपने कब्जे में लिए हैं.
यह जब्ती इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि नक्सली किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे, जिसे सुरक्षाबलों ने अपनी मुस्तैदी से नाकाम कर दिया है.
संगठित अपराध पर भी शिकंजा कसने में जुटी पुलिस
केवल उग्रवाद के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि झारखंड पुलिस राज्य के अन्य आपराधिक गिरोहों के खिलाफ भी बेहद आक्रामक तेवर अपनाए हुए है.
डीजीपी ने बहुत स्पष्ट शब्दों में यह बात दोहराई है कि पूरे प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ यानी किसी भी तरह की ढील न देने की नीति पर पूरी सख्ती से काम हो रहा है.
केवल जनवरी से जुलाई के बीच के सीमित महीनों में विभिन्न आपराधिक सिंडिकेट्स से जुड़े कुल 193 अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है.
साथ ही, इन अपराधियों के पास से कुल 63 अवैध हथियार भी जब्त किए गए हैं, जिससे यह साफ संदेश मिल गया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.


