Ranchi.झारखंड में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में 26,001 सहायक आचार्य की नियुक्ति का मामला एक बार फिर विवादों में फंस गया है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से जारी संशोधित रिजल्ट को रद्द कर दिया है। जेएसएससी को चार सप्ताह में नया रिजल्ट जारी करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही मुख्य सचिव को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है। संशोधित रिजल्ट के आधार पर अब तक 11 हजार से अधिक सहायक आचार्य विभिन्न जिलों में अपनी सेवा दे रहे हैं।
याचिकाकर्ता तुलसी महतो और अनिल कुमार यादव की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस उज्जवल भुइयां और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। याचिका में कहा गया था कि जेएसएससी ने जो संशोधित रिजल्ट जारी किया है, वह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णय के अनुरूप नहीं है।
इसमें परिमल कुमार से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले को आधार बनाया गया था। इस पर दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि स्कूली शिक्षाएवं साक्षरता विभाग के निर्देश पर जेएसएससी द्वारा तैयार किया गया संशोधित परिणाम सही नहीं था। इसलिए रिजल्ट को रद्द किया जाता है।
संशोधित रिजल्ट रद्द करने का क्या है आधार
यह मामला आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में समायोजित करने से जुड़ा है। पहली बार रिजल्ट जारी होने के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए संशोधित रिजल्ट जारी करने का निर्देश दिया। इसमें कहा गया कि आरक्षित श्रेणी के जिस अभ्यर्थी ने जेटेट में आरक्षण का लाभ ले लिया है और 60% अंक हासिल नहीं किया है, उसे अनारक्षित श्रेणी में शामिल नहीं किया जा सकता।
अनारक्षित श्रेणी में वही अभ्यर्थी आ सकता है, जिसने आरक्षण का लाभ नहीं लिया हो और जेटेट में निर्धारित 60% या उससे अधिक अंक हासिल किए हों। इस आधार पर जेएसएससी ने सितंबर 2025 से संशोधित रिजल्ट जारी करना शुरू किया। 11 हजार सहायक आचार्य की नियुक्ति हो गई।


